संख्याओं को समझने वाला दूसरा प्राणी कौवा
नई दिल्ली, । एक शोध में पता चला है कि कौवों की कांव-कांव फालतू नहीं होती है, बल्कि वे गिन-गिन कर आवाजें निकालने में सक्षम हैं। दावा है कि इंसान के बाद धरती पर संख्याओं को समझने वाला दूसरा प्राणी केवल कौवा है।
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साइंस जर्नल में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार, कौवे अपनी आवाजों यानी कांव-कांव को गिन सकते हैं। वे सोच समझकर ही कांव-कांव करते है। यह उनके संख्यात्मक कौशल का प्रदर्शन करता है। ऐसा कौशल अब तक सिर्फ इंसान में देखा गया है। शोध से जुड़े इटली के ट्रेंटो विश्वविद्यालय के न्यूरोसाइंटिस्ट जियोर्जियो वालोर्टिगारा ने कहा कि इस शोध का मकसद यह पता लगाना है कि किसी भी प्राणी में संख्यात्मक क्षमताओं की जैविक उत्पति कैसे हुई ? कौवों में इस क्षमता की पहचान करना एक बड़ी उपलब्धि है। इस शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने तीन कैरियन कौवों का इस्तेमाल किया। पहले उन्हें इंसान की कमांड के साथ कांव-कांव करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। बाद में उन्हें दृश्य और श्रव्य संकेतों को सिखाया गया। एक टच स्क्रीन पर एक से चार तक की संख्याएं लिखी गई। चार श्रवण संकेतों से भी उन्हें प्रशिक्षित किया गया। ये संकेत एक विशिष्ट संख्या से जुड़े थे।
इस तरह किया अध्ययन : प्रयोग के दौरान कौवों को स्क्रीन के सामने रखा गया। उनके सामने एक दृश्य और श्रवण संकेत प्रस्तुत किया गया। उनसे अपेक्षा की गई कि उसी संकेत के अनुरूप निर्धारित संख्या में आवाज निकालें यानी कांव-कांव करें। ऐसा करने के बाद उन्हें टच स्क्रीन पर एक एंटर बटन पर अपनी चोंच मारनी थी। यह प्रक्रिया सही तरीके से पूरी करने पर एक स्वचालित फीडर से कौवों को पुरस्कार स्वरूप पक्षी भोजन प्राप्त होता था। शोधकर्ताओं के अनुसार अधिकांश समय वे सही थे। उनका प्रदर्शन महज संयोग भर नहीं था।
संख्यात्मक विकारों के शोध में मिलेगी मदद
शोधकर्ताओं ने नतीजा निकाला कि ये पक्षी आमतौर पर सही संख्या में कांव-कांव करने के लिए निकलते हैं पर कभी-कभी रास्ता भटक भी जाते हैं। दावा है कि इस प्रकार का शोध तंत्रिका तंत्र और मनुष्य की संख्याओं को समझने के अनूठी क्षमताओं को समझने का द्वार खोलता है। इसके जरिये संख्यात्मक विकारों जैसे डिस्केल्कुलिया के अध्ययन में भी मदद मिल सकती है।