केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा मिला दंड भुगतने के बाद दोबारा दंडित करने के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है और दिवंगत डाक कर्मचारी को सेवा में मानते हुए सेवानिवृत्ति आयु तक के सेवा जनित समस्त परिलाभ का भुगतान उसके वारिसों को तीन माह में करने का निर्देश दिया है।

कैट ने कहा कि याची को पांच वर्ष के लिए लिपिक से चतुर्थ श्रेणी पद पर पदावनति दी गई थी। इस आदेश को कैट ने रद्द कर पुनः आदेश देने का निर्देश दिया। याची को दोबारा वही दंड देना कानून की निगाह में विधि विरुद्ध व न्यादार सिंह के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनादर है। याची की मूल नियुक्ति ही लिपिक पद पर की गई थी। उसे चतुर्थ श्रेणी पद पर पदावनति नहीं दी जा सकती थी।