केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को अपनी सैलरी में संशोधन के लिए अभी कुछ और समय इंतजार करना पड़ सकता है। खबरों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सिफारिशों में देरी होने की संभावना है, जिसके चलते 1 जनवरी 2026 से सैलरी रिवीजन लागू होना तय नहीं है। सूत्रों का कहना है कि वेतन आयोग की सिफारिशें अप्रैल 2026 तक सरकार को सौंपी जा सकती हैं। हालांकि, अभी इसकी समयसीमा पूरी तरह से निर्धारित नहीं हुई है, लेकिन इसमें इतना समय लगने की उम्मीद है। वहीं, सिफारिशों को लागू करने में और समय लग सकता है, जिसके चलते यह प्रक्रिया 2027 तक खिंच सकती है। ऐसे में सैलरी रिवीजन भी 2027 तक होने की संभावना है, जिससे कर्मचारियों को थोड़ा और इंतजार करना होगा।

हालांकि, सूत्रों ने यह भी बताया है कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि भले ही देरी हो, कर्मचारियों को बकाया राशि (arrears) जरूर दी जाएगी। कुल मिलाकर, कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर ही सामने आएगी।
8वां वेतन आयोग: क्या 2027 तक करना होगा इंतजार?
भले ही नए वेतन आयोग का कार्यकाल आधिकारिक रूप से 1 जनवरी 2026 से शुरू हो जाएगा, लेकिन सैलरी रिवीजन में कुछ देरी हो सकती है। संभावना है कि कर्मचारियों को 2027 के शुरुआती महीनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, इस दौरान जितनी देरी होगी, उतने महीनों का बकाया कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा। सूत्रों के अनुसार, सिफारिशें तैयार करने में 15 से 18 महीने का समय लग सकता है, जिसके कारण यह देरी हो रही है। सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद यह आयोग 15 से 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशें सौंप सकता है। आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट जमा करने से पहले एक अंतरिम रिपोर्ट भी पेश करेगा, लेकिन पूरी रिपोर्ट मई 2026 तक आने की संभावना है।
8वां वेतन आयोग: सैलरी रिवीजन में होगी देरी
विशेषज्ञों का भी मानना है कि सरकार ने 1 जनवरी 2026 से 8वें वेतन आयोग को लागू करने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन इसका काम अप्रैल से शुरू हो रहा है। ऐसे में सिफारिशें आने में कम से कम 12 महीने तो लगेंगे ही। इसके बाद भी इसे लागू करने में कुछ और समय लग सकता है, क्योंकि सिफारिशों को मंजूरी मिलने में भी वक्त लगता है। इस वजह से सैलरी रिवीजन में देरी होना स्वाभाविक है। कर्मचारियों को नए वेतनमान का लाभ 2027 की शुरुआत से मिलने की संभावना है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इसे 1 जनवरी 2026 से ही लागू करना चाहिए और कर्मचारियों को बकाया राशि देनी चाहिए। अगर 8वें वेतन आयोग को लागू करने में देरी होती है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कर्मचारियों को एकमुश्त 12 महीने का बकाया वेतन मिलेगा।
पिछले वेतन आयोगों में वेतन वृद्धि की तुलना
आइए, अब तक के वेतन आयोगों द्वारा की गई वेतन वृद्धि की सिफारिशों पर एक नजर डालते हैं:
वेतन आयोग
अनुशंसित वेतन वृद्धि (%)
दूसरा वेतन आयोग
14.20%
तीसरा वेतन आयोग
20.60%
चौथा वेतन आयोग
27.60%
पांचवां वेतन आयोग
31.00%
छठा वेतन आयोग
54.00%
सातवां वेतन आयोग
14.27%
औसत वृद्धि
27%
पिछले वेतन आयोगों को देखें तो औसतन 27% की वृद्धि हुई है। सातवें वेतन आयोग में वृद्धि केवल 14.27% थी, जिससे कर्मचारियों में काफी निराशा देखी गई थी। अब जब 8वें वेतन आयोग का गठन हो चुका है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बार सरकार कितनी वेतन वृद्धि की सिफारिश करती है।
8वां वेतन आयोग: महंगाई भत्ता कहां तक पहुंचेगा?
मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) को देखते हुए, 1 जनवरी 2026 तक डीए 60% से 62% तक पहुंच सकता है।
संभावनाएं
01.01.2026 तक अनुमानित डीए (%)
संभावित वेतन वृद्धि (%)
बहुत आशावादी (Very Optimistic)
62%
24%
बहुत निराशावादी (Very Pessimistic)
60%
12%
सामान्य अपेक्षा (Normal Expectation)
61%
18%
संभावना है कि सरकार 18% से 24% के बीच वेतन वृद्धि की सिफारिश कर सकती है। अगर 24% की वृद्धि होती है, तो फिटमेंट फैक्टर अधिक होगा और वेतन में शानदार बढ़ोतरी होगी। वहीं, अगर केवल 12% की वृद्धि होती है, तो कर्मचारियों की उम्मीदों को झटका लग सकता है।
8वां वेतन आयोग: कितना हो सकता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह 2.5 से 3.0 के बीच हो सकता है। अगर फिटमेंट फैक्टर 3.0 होता है, तो कर्मचारियों की सैलरी में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, यह सब सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, 8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, लेकिन इसके लिए उन्हें थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।