कानपुर। कानपुर में नवाबगंज में तलाकशुदा शिक्षिका का शव उसके कमरे में मिला। वह अपने मायके में रहती थीं। कमरे से दुर्गंध आने पर पड़ोसियों की शंका हुई तो पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने दखाजा तोड़कर शव को कब्जे में लिया। शव पांच दिन पुराना बताया जा रहा है। पोस्टमार्टम में भी वजह स्पष्ट न होने से विसरा और हार्ट जांच के लिए भेजा गया है। नवबगंज निवासी नमता पांडेय (55) घाटमपुर ब्लॉक के महुआपुर गांव स्थित परिषदीय स्कूल में सहायक अध्यापिका पर कार्यरत थीं। शुगर और अन्य बीमारियों के चलते कुछ दिनों से अवकाश पर थीं। गुरुवार शाम ममता के बंद कमरे से बदबू उठी ते पड़ोसियों की शंका पर पुलिस भी पहुंच गई। कमरे का दरवाजा तोड़ा गया तो सामने फर्श पर मनता का सड़ा हुआ

श्व औंधे मुह पड़ा था। सूचना पाकर मुंबई में नौकरी करने वाला ममत का एकलौता बेटा आदित्य भी देर रात नवाबगंज पहुंच गया। आदित्य ने पुलिस को बताया कि मां का पिता से कई वर्ष पूर्व तलाक हो चुका है। मां से अक्रूर फोन पर ही बात होती थी। दीपावली पर उत्ते घर भी आना था। नवाबगंज थाना प्रभारी दीनानाथ मिश्रा ने बताया कि शव चार-पांच दिन पुराना लग रहा है। फिलहाल किसी तरह के आरोप की बात सामने नहीं आई है। बेटे आदित्य के अनुसार नीचे ग्राउंड फ्लोर पर मामा विनय पांडेय रहते हैं, लेकिन मां का उनसे मतलब नहीं रहता था। थाना प्रभारी ने बताया कि ममता की शादी साल 1998 में मध्य प्रदेश के एक शख्स से हुई थी। पति से वर्ष 2000 में तलाक होने के बाद वह मायके में बेटे के साथ आकर रहने लगीं थीं। आसपास के लोगों की मानें तो ममता के करीब पांच दिन से किसी ने देखा भी नहीं था। ममता पांडेय बीते पांच दिनों से स्कूल नर्ह गई थीं। आखिरी बार वह
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शनिवार पांच अक्तूबर को स्कूल आईं थीं। बस आदि से स्कूल जाने के कारण अक्सर उन्हें स्कूल पहुंचने में देर हो जाती। सोमवार को साथी शिक्षकों ने ममता को फोन किया तो मोबाइल स्विच ऑफ मिला। साथियों ने मुंबई फोन कर आदित्य से भी ममता के स्कूल न आने का कारण पूप्ा, लेकिन कुछ स्पष्ट नहीं हो सका। साथी शिक्षकों के मुताबिक ममता कुछ दिनों से परेशान रहती थीं। ज्यादा किसी से बात नहीं करती और छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ती थीं। एक बार उन्होंने कक्षा तीन की मेधावी बच्ची को हैंडपंप चलाने की कोशिश करने पर पीट दिया। इस पर लोगों ने नाराजगी जताई, तो मम्ता ने पुलिस बुला ली थी। परिजनों के मुताबिक शुक्रवार सुबह शव को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाने
के लिए पुलिस ने वहीं से दो प्राइवेट कर्मचारी बुलाए, लेकिन सड़े हुए शव की हालत कर्मियों ने पांच हजार रुपये की मांग कर दी। काफी कहासुनी के बाद भी जब कर्मी नहीं मने, तो मजबूरन घरवालों को रुपये देने पड़े। पोस्टमार्टन की वसूली का केस्सा यही खत्म नहीं हुआ, बल्कि दोपहर 12 बजे जब ममता के शव का नंबर आया। यहां भी कर्मियों ने उसे भीतर तक पहुंचाने के लिए 1000 रुपये की नांग कर दी। परिजनों का आरोप है के जब कर्मियों की मांग पूरी नहीं हुई तो शव का पोस्टमार्टम ही रोक दिया। नवाबगंज के बाद आए बर्रा और शवराजपुर के शवों का पोस्टमार्टम करना शुरू कर देया। आखिर में जब परेजनों ने कर्मियों को मजबूरन 1000 रुपये दिए, तब जाकर कहीं दोपहर दो बजे ममता के शव का पोस्टमार्टम शुरू किया गया।