सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। शीर्ष अदालत ने यह मौखिक टिप्पणी कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई के दौरान की।n

- स्कूल रेडीनस फेज-1 एंडलाइन आकलन 2026: कक्षा 1 शिक्षक 30 अप्रैल तक प्रेरणा ऐप पर DCF से करें मूल्यांकन, देखें यूजर मैन्युअल
- भीषण गर्मी के चलते स्कूल समय बदला, सुबह 7:30 से दोपहर 12:30 तक कक्षाएं
- स्थानांतरण वाले #शिक्षामित्र भाई बहनों के लिए कार्यभार ग्रहण प्रपत्र प्रारूप ✅✅🙏👇👇
- ब्रिज कोर्स _69K पंजीकरण की नई अंतिम तिथि 30 अप्रैल, 2026 की मध्यरात्रि तक बढ़ाई गई……. 🤔
- जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना हेतु नियुक्त प्रगणक / पर्यवेक्षकों में नियुक्त प्र०अ० / इं०प्र०अ० को जनगणना ड्यूटी से मुक्त करने के सम्बन्ध में
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 77 समुदायों को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) में शामिल करने का निर्णय रद्द कर दिया था। इन 77 समुदायों में अधिकांश मुस्लिम समुदाय से हैं। जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि क्या सैद्धांतिक रूप में मुस्लिम आरक्षण के हकदार नहीं हैं। इस पर जस्टिस गवई ने मौखिक तौर पर कहा कि धर्म के आधार पर किसी तरह का आरक्षण नहीं दिया जा सकता।