संतकबीरनगर। खलीलाबाद ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सरौली चहारुम में तैनात हेडमास्टर ने विद्यालय में खर्च के लिए आई हुई रकम को अपनी पत्नी के व्यक्तिगत खाते में भेजवा दिया।
इसकी जब जांच हुई तो मामला प्रकाश में आया। पिछले साल खर्च की गई रकम का भी कोई बिल बाउचर नहीं मिला। बीएसए ने हेडमास्टर को निलंबित करते हुए बीईओ नाथनगर को इसकी जांच सौंपी है। बीईओ खलीलाबाद जनार्दन यादव ने 30 नवंबर 2024 को प्राथमिक विद्यालय सरौली चहारूम का निरीक्षण किया।
यहां विद्यालय में प्रबंध समिति का गठन नहीं किया गया था। विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में भेजी गई रकम की जांच हुई तो पता चला कि विभाग के जरिए भेजी गई रकम को प्रधानाध्यापक ने पत्नी के व्यक्तिगत खाते में भेजा दिया है।
बीईओ ने जब जांच की तो पाया कि 19 मार्च 2024 को पत्नी के खाते में 15723 रुपये, 21 मार्च 2024 को 25150 रुपये कुल 40,873 रुपये पत्नी के खाते में भेजा जाना पाया।
इसके साथ ही पिछले साल प्रबंध समिति के खाते में भेजी गई रकम 11 हजार रुपये कोई भी बिल बाउचर नहीं दिखाया गया। इसके बाद प्रधानाध्यापक शिव कुमार धर दुबे को 20 दिसंबर 2024 को स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया
लेकिन उन्होंने अपना स्पष्टीकरण बीईओ को उपलब्ध नहीं कराया। बीईओ ने अपनी रिपोर्ट बीएसए को भेजी। जिसमे लिखा है कि प्रधानाध्यापक शिव कुमार धर दुबे के जरिए धनराशि के उपयोग में अनियमितता की गई है।
उच्चाधिकारियों के आदेश का अनुपालन नहीं किया है। यह अनियमितता और गबन की श्रेणी में आता है। बीईओ की रिपोर्ट पर बीएसए ने तत्काल प्रभाव से बीईओ की जांच में हेडमास्टर अनियमितता के दोषी मिले हैं। रिपोर्ट के आधार पर हेडमास्टर को निलंबित कर दिया गया है। आरोप पत्र जारी कर दिया गया है। बीईओ नाथनगर को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई है। हेडमास्टर को निलंबित कर दिया है। उन्हें प्राथमिक विद्यालय टुंगपार से संबंद्ध कर दिया है।
– अमित कुमार सिंह, बीएसए
भेजी गई धनराशि, खर्च न करने वाले 67 हेडमास्टरों को दी गई है प्रतिकूल प्रविष्टि
परिषदीय स्कूलों में भेजी गई धनराशि का उपयोग न करने वाले 67 हेडमास्टरों को दिसंबर माह में प्रतिकूल प्रविष्टि दी जा चुकी है। जिले में 1247 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें एक लाख सात हजार विद्यार्थी हैं। इनके पठन-पाठन से लेकर विद्यालय की सुरक्षा, भवन निर्माण, फर्नीचर व खेल सामग्री के लिए शासन स्तर से छात्र संख्या के हिसाब से धनराशि विद्यालय में भेजी गई थी। विद्यालय प्रबंध समिति को वित्तीय नियमों का पालन करते हुए गुणवत्तापूर्ण सामग्री खरीदनी थी, लेकिन, 67 स्कूलों ने इस धनराशि का व्यय नहीं किया और बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। बीएसए ने इन विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और इंचार्ज प्रधानाध्यापक
