लखनऊ। राजधानी के अपर प्राइमरी स्कूल महीपतमऊ में दो वर्ष से तिरपाल के नीचे कक्षाएं चल रही हैं। स्कूल का भवन 10 वर्ष से जर्जर है। स्कूल के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गई है। शिक्षकों ने बीईओ से लेकर बीएसए तक को कई शिकायती पत्र भेजे, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की और न हाईटेंशन लाइन हटवाने का प्रयास किया। जर्जर भवन के ढहने और हाईटेंशन लाइन के डर से शिक्षकों ने खुद के खर्च से बांस के टट्टर और तिरपाल से तीन अस्थायी कक्षाएं बनवाईं। 25 जुलाई को राजस्थान में एक सरकारी स्कूल की घटना के बाद बीएसए राम प्रवेश ने जर्जर स्कूलों में कक्षाएं न संचालित करने का आदेश जारी किया था, लेकिन जर्जर स्कूलों की मरम्मत के सम्बंध में कोई कदम नहीं उठाए।

काकोरी के महीपतमऊ में वर्ष 2008 में अपर प्राइमरी स्कूल का नया भवन बना था। तालाब के किनारे बने स्कूल के कमरों में छह वर्ष बाद ही सीलन आने से दीवारों व छतों में दरारें पड़ने लगीं और प्लास्टर उखड़ने लगा। इतने कम समय में स्कूल भवन जर्जर होने पर ब्लॉक के कई शिक्षकों ने निर्माण पर सवाल उठाए थे। इसकी शिकायतें भी हुईं, लेकिन कुछ दिन बाद मामला शांत हो गया। वर्ष 2015 में अभिभावकों के दबाव में स्कूल के शिक्षकों ने सामूहिक रूप से भवन की मरम्मत के लिए विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखा था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। निजी ठेकेदार ने मरम्मत में 50 हजार रुपये का खर्च बताया। रुपये न मिलने पर मरम्मत नहीं हो पाई।