नीदरलैंड, जर्मनी और स्वीडन के शोधकर्ताओं ने किया अध्ययन
न्यूयॉर्क, एजेंसी। ऐसा माना जाता है कि वीडियो गेम खेलना नुकसानदायक होता है, लेकिन एक नए शोध का दावा है कि यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो इससे बच्चों की सोचऔर समझ बढ़ती है।

नीदरलैंड, जर्मनी और स्वीडन के शोधकर्ताओं ने मिलकर करीब दस हजार बच्चों पर अध्ययन किया। अध्ययन के नतीजे को साइंटिफिक रिपोर्ट्स नामक पत्रिका में प्रकाशित भी किया गया। शोध में वीडियो गेम खेलने की आदत को बच्चों की बुद्धिमत्ता में वृद्धि से जोड़ा और संज्ञानात्मक क्षमताओं में अंतर देखा गया।
गतिविधियों की मॉनिटरिंग :
शोधकर्ताओं ने 9,855 बच्चों (9-10 वर्ष) के स्क्रीन टाइम की रिकॉर्डिंग का आकलन किया। इनमें से अधिकांश बच्चों ने बताया कि वे रोजाना ढाई घंटे टीवी या ऑनलाइन वीडियो देखने में, एक घंटा वीडियो गेम खेलने में अपना समय बिताते हैं। आईक्यू स्तर मापने के लिए बच्चों की गतिविधियों के प्रदर्शन पर नजर रखी गई। इसमें पढ़ने की समझ, स्मृति, सोच और आत्म नियंत्रण पर केंद्रित कार्य शामिल थे।
आईक्यू 2.5 अंकों तक बढ़ी
: अध्ययन में शामिल जिन बच्चों ने रोजाना वीडियो गेम खेलने की बात
कही थी उनकी आईक्यू 2.5 अंकों तक बढ़ गई थी।
बच्चों की रचनात्मकता को भी
मिल रहा मंच: बदलते समय के साथ वीडियो गेम्स का रूप भी बदलता जा रहा है। यह कहानी सुनाने, रणनीति बनाने और विश्लेषण प्रणाली से कम नहीं। गेम्स में बच्चे खुद को जैसे चाहें, वैसे बना सकते हैं। अपने किरदार का लुक, भूमिका, और खेलने का तरीका खुद तय करना उन्हें आत्मनिर्भर बनाता
है। इसके अलावा कई गेम ऐसे हैं जो टीमवर्क को बढ़ावा देता है।
स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के न्यूरोसाइंटिस्ट टोर्केल क्लिंगबर्ग ने कहा, ‘हमारे परिणाम इसका समर्थन करते हैं कि वीडियो गेम खेलने से वास्तव में बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।’ उन्होंने यह भी कहा कि शारीरिक गतिविधि, नींद, स्कूल के प्रदर्शन पर प्रभावों की जांच के लिए आगे अध्ययन