Home PRIMARY KA MASTER NEWS उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में टीईटी पात्रता न रखने वाले अध्यापकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज, वरिष्ठता सूची में बड़े अनियमितता का खुलासा

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में टीईटी पात्रता न रखने वाले अध्यापकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज, वरिष्ठता सूची में बड़े अनियमितता का खुलासा

by Manju Maurya

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में टीईटी पात्रता न रखने वाले अध्यापकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज, वरिष्ठता सूची में बड़े अनियमितता का खुलासा

प्रयागराज, 22 अगस्त 2025: उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में टीईटी (अध्यापक पात्रता परीक्षा) की न्यूनतम योग्यता पूरी न करने वाले अनेक अध्यापकों के सेवा में रहने और वरिष्ठता सूची में उनके नाम शामिल होने को लेकर बड़ी शिकायतें सामने आई हैं। जिले के कई खण्ड शिक्षा अधिकारियों को भेजे गए प्रार्थना पत्रों द्वारा इस मामले को गंभीरता से उठाया गया है, जिसमें मांग की गई है कि ऐसे अध्यापकों से स्पष्टीकरण लेकर उनके खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई तुरंत की जाए।

प्राथमिकी शिकायत

विनय कुमार पाण्डेय, प्रयागराज के निवासी, ने 8 अगस्त 2025 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रतापगढ़ को एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने यह बताया कि वेबसाइट पर अपलोड की गई वरिष्ठता सूची में दर्ज अनेक अध्यापक अपनी मूल नियुक्ति तिथि तक टीईटी की न्यूनतम पात्रता पूरी नहीं कर पाए थे, बावजूद इसके उनके नाम सूची में शामिल हैं। इस सूची में हजारों अध्यापकों के नाम ऐसे हैं जो 23 अगस्त 2010 के बाद नियुक्त हुए लेकिन उन्होंने टीईटी उत्तीर्ण नहीं किया। यह स्थिति आरटीई एक्ट, 2009 और एनसीटीई नोटिफिकेशन (23-08-2010) के स्पष्ट उल्लंघन में आती है।

अनियमितता का विस्तार

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि वरिष्ठता सूची में कुछ अध्यापक ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी मूल नियुक्ति के बाद टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन उनकी नियुक्ति के समय यह पात्रता जरूरी थी, जिससे शासन की नीतियों का उल्लंघन होता है। इसके अलावा, कुछ अध्यापक वर्ष 2012 की टीईटी पास होने का दावा करते हैं जबकि उस वर्ष टीईटी परीक्षा आयोजित ही नहीं हुई थी। ऐसे मामले विभाग में गम्भीर अनियमितताओं की ओर संकेत करते हैं।

न्यायालय के निर्देश और शिक्षा परिषद की चेतावनी

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज ने 9 मई 2025 को जारी पत्र में उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि 22 दिसंबर 2018 तक शैक्षिक योग्यता प्राप्त न करने वाले 69 हजार से अधिक सहायक अध्यापकों के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाए। इस निर्देश के बावजूद विभाग में ऐसे ही पदस्थापन और सूची प्रबंधन जारी रहना एक बड़े प्रशासनिक चूक को दर्शाता है।

कानूनी फैसले भी स्पष्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की फुल बेंच द्वारा 31 मई 2013 और 12 सितम्बर 2015 तथा भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 25 जुलाई 2017 को जारी फैसलों में स्पष्ट किया गया है कि आरटीई एक्ट, 2009 के बाद नियुक्त सहायक अध्यापकों के लिए टीईटी होल्डिंग आवश्यक है। इसके बिना नियुक्ति अवैध मानी जाती है और शासन की इस व्यवस्था का उल्लंघन अनुचित है।

खण्ड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा संबंधित सभी खण्ड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे वरिष्ठता सूची का पूर्ण परीक्षण करते हुए ऐसे सभी अध्यापकों का विवरण तुरंत प्रस्तुत करें जो टीईटी उम्मीदवार नहीं हैं या समय पर योग्यता पूरी नहीं कर पाए। इसके साथ ही स्पष्टीकरण मांगकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

आखिरकार, बच्चों के हितों की रक्षा और गुणवत्ता शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे नियमों का कड़ाई से पालन अत्यंत आवश्यक बताया गया है। जिन्हें अपनी योग्यता साबित नहीं करनी, वे बच्चों को पढ़ाने के योग्य नहीं माने जाएंगे।

ज्ञात रहे कि इस मामले में पूर्व में भी कई प्रार्थनापत्र 16 अक्टूबर 2023 और 7 जून 2025 को विभाग को भेजे जा चुके हैं, जिन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वर्तमान में इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जल्द उचित प्रशासनिक कदम उठाने की मांग मुखर हो रही है।

विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि इस प्रकार की अनियमितताएं शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वे शीघ्र प्रभावी कार्रवाई करके कार्य पारदर्शिता सुनिश्चित करें और बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षण व्यवस्था स्थापित करें।

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