Home News अपने भूले निवेश को पोर्टल पर आसानी से ढूंढ़कर वापस पाएं

अपने भूले निवेश को पोर्टल पर आसानी से ढूंढ़कर वापस पाएं

by Manju Maurya

लाखों देशवासियों का पैसा विभिन्न खातों में लावारिस (अनक्लेम्ड) पड़ा हुआ है। अब इसे उनके मालिक तक पहुंचाने की पहल चल रही है। सरकार ने इसके लिए ‘आपका पैसा, आपका अधिकार’ अभियान शुरू किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि वे इसका हिस्सा बनें। यह अवसर भूली हुई संपत्ति को फिर पाने का मौका है। अभियान का मकसद बैंक जमा, बीमा, लाभांश, शेयर, म्यूचुअल फंड और पेंशन सहित लावारिस वित्तीय संपत्तियों को वैध दावेदारों तक पहुंचाने में मदद करना है।

केंद्र सरकार ने निष्क्रिय बैंक खातों, म्यूचुअल फंड और डीमैट खातों में पड़ी बिना दावे वाली राशि को उनके दावेदारों तक पहुंचाने के लिए यह विशेष अभियान चलाया हुआ है। यह अभियान अक्तूबर से लेकर दिसंबर तक देश के सभी शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में चलेगा। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस अभियान को और बढ़ाया जाएगा। इस अभियान को सफलता के लिए देशभर के 477 जिलों में सुविधा शिविर लगाए गए हैं। इन सुविधा शिविरों का आयोजन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किया गया है। इन शिविरों को खास तौर पर दूर-दराज के इलाकों में लगाया गया है, ताकि हर नागरिक तक इसकी पहुंच हो सके। लोगों से अपील की गई है कि वे इस सुविधा का लाभ उठाते हुए बिना क्लेम किए गई बैंक जमा, बीमा की रकम, डिविडेंड या शेयर निवेश का पता लगाकर उनके लिए दावा कर सकते हैं।

एक लाख करोड़ की लावारिस रकम : सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के विभिन्न वित्तीय संस्थानों में करीब एक लाख करोड़ रुपये की रकम बिना दावे के पड़ी हुई है। इसमें भारतीय बैंकों के पास 78,000 करोड़ रुपये, बीमा कंपनियों के पास लगभग 14,000 करोड़, म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास लगभग 3,000 करोड़ और 9,000 करोड़ रुपये के लाभांश भी लावारिस पड़े हैं।

अलग-अलग पोर्टल : बिना दावे वाली संपत्ति को पाने के लिए सरकार ने विभिन्न पोर्टल तैयार किए हैं। इनकी मदद से लोग भूली रकम की जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके तहत आरबीआई के उद्गम पोर्टल से बैंक में पड़ी बिना दावे वाली राशि की जानकारी हासिल कर सकते हैं। वहीं, इरडा का ‘बीमा भरोसा’ पोर्टल बीमा पॉलिसियों से जुड़े पैसे के लिए, सेबी का ‘मित्र’ पोर्टल म्यूचुअल फंड की लावारिस रकम के लिए और कॉर्पोरेट मंत्रालय का IEPFA पोर्टल डिविडेंड और बिना दावे वाले शेयरों को वापस पाने के लिए तैयार किया गया है।

3. जीवन बीमा : बीमा भरोसा पोर्टल से मदद लें

1. बीमा नियामक के बीमा भरोसा पोर्टल (https:// bimabharosa. irdai.gov.in/) पर जाएं। यहां Unclaimed Amount टैब पर क्लिक करें।

2. इससे नया पेज खुलेगा। पॉलिसीधारक का नाम, जन्मतिथि और जहां मांगा जाए वहां पैन/आधार डालें। फोन नंबर और बीमा के प्रकार तथा कंपनी का नाम दर्ज करें।

3. फिर सब्मिट बटन पर क्लिक करें। पोर्टल अपने-आप रिकॉर्ड खोज लेगा। इसमें बीमा कंपनी का नाम, पॉलिसी नंबर (आंशिक), अनक्लेम्ड रकम और पॉलिसी का प्रकार दिखाई देगा।

4. जिस पॉलिसी का पैसा चाहिए, उस पर “Claim Now” दबाएं। आपको उसी बीमा कंपनी के ऑनलाइन क्लेम फॉर्म पर भेज दिया जाएगा।

5. इसके बाद जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करें। बीमा कंपनी कागज़ों की जांच करेगी। यदि कोई कमी होगी तो एमएमस या ई-मेल से बताएगी।

6. सब सही होने पर क्लेम मंजूर हो जाएगा। क्लेम पास होते ही अनक्लेम्ड बीमा राशि सीधे आपके खाते में जमा हो जाती है। इसमें आमतौर पर इसमें 15 से 30 दिन लगते हैं।

● जरूरी दस्तावेज : आधार, पैन, बैंक पासबुक/कैंसिल चेक और पॉलिसी कॉपी (अगर हो)। अगर पॉलिसीधारक की मृत्यु हो चुकी है तो मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिस के कागज भी लगेंगे।

2. म्यूचुअल फंड : मित्र पोर्टल से ढूंढें रकम

1. एमएफ सेंट्रल की वेबसाइट (https://app.mfce ntral.com) पर होमपेज में मित्र लिंक पर क्लिक करें।

2. इससे नया पेज खुल जाएगा। यहां दिए गए बॉक्स में पैन नंबर दर्ज करें। फिर प्रोसीड का बटन दबाएं।

3. इसके बाद ईमेल पता या मोबाइल नंबर दर्ज करें, जिस पर ओटीपी भेजा जाएगा। फिर मोबाइल पर आए ओटीपी को दर्ज कर प्रोसीड का बटन दबाएं।

4. इससे नया पेज खुलेगा। अब अपना या किसी अन्य व्यक्ति का खाता खोजना चाहते हैं तो अपना या उसका नाम दर्ज करें।

5. इसके अलग-अलग विकल्प दिखाई देंगे। जैसे- पैन नंबर, ईमेल, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, बैंक खाता संख्या। इनमें से किसी एक का चयन कर दर्ज करें।

6. फिर अगले कॉलम में भी पता, नॉमिनी का नाम, शहर, पिनकोड में से किसी एक का चयन करें।

6. फिर अगले कॉलम में भी पता, नॉमिनी का नाम, शहर, पिनकोड में से किसी एक का चयन करें।

7. अगर म्यूचुअल फंड खाता का नंबर की जानकारी है तो उसे दर्ज कर सकते हैं। साथ ही कंपनी का नाम चुनें।

8. इसके बाद प्रोसीड का बटन दबाएं। खोज करने के बाद प्लेटफ़ॉर्म आपको संभावित निष्क्रिय खाते दिखाएगा, जिसमें फंड हाउस, स्कीम नाम आदि शामिल होंगे।

9. यदि आपको निष्क्रिय फोलियो मिले हों, तो संबंधित म्यूचुअल फंड कंपनी या आरटीए से संपर्क करें, अपनी केवाईसी अपडेट करें और आगे के दस्तावेज़ जमा करें।

● सबसे पहले आरबीआई के उद्गम पोर्टल (https://udgam.rbi.org.in) पर जाएं। यहां सबसे पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके लिए रजिस्टर बटन पर क्लिक करें।

● फिर बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर, अपना नाम दर्ज करें और पासवर्ड तय करें। इससे पंजीकरण हो जाएगा। अब लॉगिन लिंक पर क्लिक करें।

● अपना मोबाइल नंबर और पासवर्ड डालकर लॉगिन करें। इससे आपने मोबाइल पर ओटीपी आएगा। उसे सत्यापित करें। इससे नया पेज खुलेगा।

● यहां खाताधारक का नाम, जिस बैंक में खाता था उसे दर्ज करें। यदि बैंक का नाम भी याद नहीं है तो ऑल बैंक विकल्प पर क्लिक करें।

● इसके बाद खाताधारक का पैन कार्ड नंबर, वोटर आईडी नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस नंबर, पासपोर्ट नंबर (जो भी उपलब्ध हो) दर्ज करें। साथ ही उसकी जन्मतिथि दर्ज दर्ज करें। फिर सर्च का बटन दबाएं।

● इसके बाद पोर्टल पर जिस-जिस बैंक में खाताधारक के निष्क्रिय खाते होंगे, उसकी सूची प्रदर्शित होगी। उसमें संभावित राशि भी दिखेगी।

● अब बैंक का नाम, उसकी मूल ब्रांच और संभावित राशि को एक पेपर पर नोट कर लें। फिर संबंधित बैंक की शाखा में जाकर दावा प्रक्रिया को पूरा करें।

4. शेयर, डिविडेंट या बांड : कॉरपोरेट मंत्रालय का विशेष पोर्टल

1. सबसे पहले कॉर्पोरेट मंत्रालय के पोर्टल (www.mca.gov.in) पर जाएं। यहां mca services विकल्प पर जाएं। फिर इसके तहत IEPF रिटेलेड सर्विस पर क्लिक करें। फिर IEPF वेब फॉर्म लिंक पर क्लिक करें।

2. इससे नया पेज खुल जाएगा। यहां चार चार चरणों में पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करें। इससे लॉगइन आईडी और पासवर्ड प्राप्त होगा।

3. इनसे लॉगइन करें। फिर mca services में जाएं। IEPF रिटेलेड सर्विस लिंक के तहत सर्च अनक्लेम्ड अनपेड अमाउंट एंड शेयर लिंक पर क्लिक करें।

4. इससे नई विंडो में सर्च विकल्प खुल जाएगा। यहां अपना पैन नंबर डालकर सर्च बटन पर क्लिक करें। यदि आपका कोई भी अनक्लेम्ड शेय, डिविडेंट या बान्ड होगा तो यहां दिख जाएगा।

5. अब इसे क्लेम करने के लिए उस पर क्लिक करें और IEPF-5 वेब फॉर्म भरें। इसमें निवेशक का नाम, कंपनी का नाम, डिविडेंड/ शेयर/बॉन्ड का विवरण, बैंक और डिमैट डिटेल भरनी होगी।

6. फॉर्म सबमिट करें फॉर्म का Acknowledgement (SRN) निकाल लें।

7. फिर IEPF-5 का प्रिंटआउट, सभी दस्तावेज़ों की स्वप्रमाणित कॉपी, कवरिंग लेटर को उस कंपनी के Nodal Officer (IEPF) को भेजें, जिस कंपनी के शेयर/डिविडेंड का दावा है।

8. आपका दावा प्राप्त होने के बाद कंपनी सत्यापन करेगी। सब सही होने पर सत्यापन रिपोर्ट IEPFA को भेजेगी। इसमें 15–30 दिन लगते हैं।

9. अब IEPFA कंपनी की रिपोर्ट देखेगा। अगर कोई कमी होगी तो ईमेल से सूचना देगा। दावा मंजूर होते ही डिविडेंड/बॉन्ड राशि →सीधे आपके डीमैट या बैंक खाते में भेजे जाएंगे। यह पूरी प्रक्रिया आमतौर पर 2 से 4 महीने में पूरी होती है।

● जरूरी दस्तावेज : आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक या कैंसिल चेक, डिमैट खाते का ब्योरा, पते का प्रमाण, शेयर सर्टिफिकेट (फिजिकल हो तो), डिविडेंड वारंट/पुराना स्टेटमेंट (अगर है), फोलियो नंबर/क्लाइंट आईडी

● निवेश की मृत्य हो गई है तो : मृत्यु प्रमाण पत्र, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र / वसीयत / लीगल हेयर सर्टिफिकेट, वारिसों का अनापत्ति प्रमाणपत्र (जहां लागू हो)

1. बैंक जमा (बचत खाता/ एफडी)

● बैंक में पैसा कब अनक्लेम्ड माना जाता है?

अगर 10 साल तक खाते/एफडी/ आरडी में कोई लेन-देन नहीं हुआ और खाताधारक ने पैसा नहीं निकाला, तो वह राशि अनक्लेम्ड मानी जाती है।

● क्या अनक्लेम्ड बैंक पैसा खत्म हो जाता है?

नहीं। पैसा खत्म नहीं होता। बाद में दावा किया जा सकता है।

● अनक्लेम्ड बैंक राशि का दावा कैसे करें?

संबंधित बैंक शाखा में पहचान पत्र, खाता विवरण और बैंक फॉर्म देकर दावा किया जा सकता है।

● खाताधारक की मृत्यु हो जाए तो पैसा कौन ले सकता है?

नॉमिनी या वारिस मृत्यु प्रमाण पत्र और पहचान पत्र देकर दावा कर सकते हैं।

2. शेयर और डिविडेंड

● शेयर या डिविडेंड कब अनक्लेम्ड होते हैं?

अगर 7 साल तक डिविडेंड नहीं लिया गया, तो पैसा और शेयर सरकार के IEPF में ट्रांसफर हो जाते हैं।

● अनक्लेम्ड शेयर/डिविडेंड का रिकॉर्ड कहाँ मिलता है?

कंपनी वेबसाइट या Investor Education and Protection Fund Authority की साइट पर।

● क्या 10–15 साल पुराने शेयर भी वापस मिल सकते हैं?

हां। कोई समय सीमा नहीं है, दावा कभी भी किया जा सकता है।

● शेयर/डिविडेंड का दावा कैसे किया जाता है?

IEPF-5 फॉर्म भरकर, दस्तावेज़ कंपनी को भेजकर।

3. म्यूचुअल फंड

● म्यूचुअल फंड में अनक्लेम्ड राशि क्यों बनती है?

निवेशक से संपर्

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