इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय (WRIA No. 19185 of 2025, दिनांक 27 जनवरी 2026) का सार :👇
1️⃣धारा– 18 के तहत तदर्थ प्रधानाचार्य का वेतन पाने का हकदार केवल वही प्रधानाचार्य होंगे, जहां प्रबंध तंत्र ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 की धारा–10 की उपधारा (1) के तहत चयन बोर्ड को प्रधानाचार्य पद का विधिवत अधियाचन भेजा हो। अगर अधियाचन भेजने के दो महीने के भीतर बोर्ड स्थाई प्रधानाचार्य की नियुक्ति करने में अक्षम रहा हो, तभी तदर्थ प्रधानाचार्य को प्रधानाचार्य के समान वेतन देय होगा।

2️⃣हाईकोर्ट ने 27 जनवरी तक का वेतन देने को कहा, 27 जनवरी के बाद का वेतन जांच के बाद
3️⃣जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को निर्देश : पूर्व में हुए सभी तदर्थ प्रधानाचार्य की नियुक्ति का विधिवत जांच करेंगे कि धारा 18 के तहत तदर्थ नियुक्ति से पूर्व धारा 10 की उपधारा– (1) के तहत चयन बोर्ड को प्रधानाचार्य पद का अधियाचन भेजा गया था, और पूर्व शर्ते पूरी की गई थी?
4️⃣अगर तदर्थ नियुक्ति से पूर्व चयन बोर्ड को अधियाचन भेजा गया होगा, तो ऐसे नियुक्त सभी तदर्थ प्रधानाचार्य को वेतन जारी रहेगा।
5️⃣अगर तदर्थ प्रधानाचार्य की नियुक्ति से पूर्व चयन बोर्ड को अधियाचन नहीं भेजा गया था, तो 27 जनवरी के बाद ऐसे प्रधानाचार्य को प्रधानाचार्य के समान वेतन रुक जाएगा।
6️⃣पूर्व में भुगतान की गई वेतन की रिकवरी नहीं होगी। कोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा— जो वेतन पहले दे दिया गया है, उसकी वसूली (Recovery) नहीं होगी। लेकिन 27 जनवरी के बाद अब उन्हें वेतन नहीं दी जाएगी।
7️⃣ऐसे स्कूल जिन्होंने प्रधानाचार्य पद का अधियाचन नहीं भेजा था, 4 सप्ताह में शिक्षा सेवा चयन आयोग को विधिवत अधियाचन भेजेंगे।