तीन को दोबारा दिया गया लाभ बीएसए ने बैठाई जांच
रायबरेली : बेसिक शिक्षा विभाग के करीब 1300 परिषदीय शिक्षकों को दिसंबर 2025 व जनवरी 2026 में चयन वेतनमान जारी हुआ था। इसमें वित्त एवं लेखाधिकारी की जांच में 50 शिक्षकों का चयन वेतनमान फर्जी तरीके से जारी होना पाया गया। मामले में वित्त लेखाधिकारी ने बेसिक शिक्षाधिकारी राहुल सिंह को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी। मामले में बीएसए ने जांच के आदेश दिए हैं।

10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को चयन वेतनमान का लाभदिया जाता है। तीन सूची के माध्यम से करीब 1300 शिक्षकों की सूची चयन वेतनमान के लिए मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड की गई। मानव संपदा पोर्टल पर वित्त लेखाधिकारी सिद्धार्थ दीक्षित ने शिक्षकों की ई-सेवा पुस्तिका एवं वेतन बिल की संयुक्त समीक्षा की। इस दौरान पाया गया कि चयन वेतनमान की सूची में गड़बडी हैं।
इसके बाद मामले की विस्तृत जांच की गई, जिसमें पाया गया कि 14 विकास खंडों के 50 लोगों को फर्जी तरीके से चयन वेतनमान जारी कर दिया गया है। चयन वेतनमान की सूची में नौ ऐसे शिक्षक है जो मानक से कम मूल वेतन पा रहे हैं। 15 शिक्षकों की ई-सेवा पुस्तिका में त्रुटि पूर्ण सेवा इतिहास है। वहीं आठ शिक्षक ऐसे भी हैं जिनका प्रभावी
चयन वेतन तिथि से दो से तीन वर्ष के बाद ही चयन वेतनमान जारी कर दिया गया। चार शिक्षक ऐसे हैं जिनका प्रभावी चयन वेतन तिथि से पांच से छह वर्ष के बाद आदेश जारी हो गया।
पांच शिक्षकों की नियुक्ति एवं सेवा इतिहास के आधार पर गलत प्रभावी तिथि को आधार मानकर आदेश निर्गत करा गया। प्राथमिक कैडर 4600 ग्रेड का वेतन पा रहे तीन शिक्षकों को दुबारा इसका लाभ दिया गया। एक शिक्षक जो कि संविदा पर है उसको भी इस सूची में शामिल कर लिया। गंभीर बात रही कि एक मृतक शिक्षक को चयन वेतनमान का लाभदिया गया। ई-सेवा पुस्तिका में नियुक्त विवरण गलत होने के बावजूद उसको भी लाभ दिलाया गया। एक समान कैडर में 10 वर्ष पूर्ण न करने में शिक्षिका को सूची में शामिल किया गया। मानक से अधिक त्रुटिपूर्ण मूल वेतन पा रही और किसी मामले में जांच का सामना कर रही दोनों शिक्षिकाओं को विभाग ने लाभसे नवाजा है।