प्रयागराजः अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों की प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) एवं प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी), एडेड महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर तथा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में अक्सर विवादित प्रश्न पूछे जाने के कारण भर्ती प्रक्रिया बाधित होती है। न्याय की उम्मीद में अभ्यर्थी अदालतों की शरण में जाते हैं। सुनवाई और निर्णय में समय लग जाने के कारण भर्तियां विलंबित होती हैं। ऐसे में प्रतियोगी छात्र प्रतिनिधिमंडल के शीतला प्रसाद ओझा, दिनेश यादव ने विवादित प्रश्नों को परीक्षा में शामिल नहीं करने की मांग को लेकर उत्तर
प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के उप सचिव संजय कुमार सिंह को ज्ञापन दिया। आयोग के अध्यक्ष को संबोधित ज्ञापन में अभ्यर्थियों ने कहा है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने का कार्य ऐसे प्राध्यापकों को दिया जाए, जो अनुभवी हों और जिनके तैयार किए गए प्रश्न पूर्व में विवादित न रहे हों। इस पर विशेष ध्यान दिया जाए कि प्रश्नों के उत्तर में केवल एक ही विकल्प सही हो। एक से अधिक विकल्प सही होने पर अभ्यर्थी आपत्तियां दर्ज कराते हैं, लेकिन उनकी आपत्ति के अनुरूप निर्णय नहीं लिए जाने पर मामले हाई कोर्ट पहुंचते हैं और भर्तियां पिछड़ जाती हैं।