Home PRIMARY KA MASTER NEWS राज्यों का दोहरा रवैया: केंद्र से ब्याज मुक्त कर्ज लेकर बुनियादी ढांचे के बजट में कर रहे कटौती

राज्यों का दोहरा रवैया: केंद्र से ब्याज मुक्त कर्ज लेकर बुनियादी ढांचे के बजट में कर रहे कटौती

by Manju Maurya

राज्यों का दोहरा रवैया: केंद्र से ब्याज मुक्त कर्ज लेकर बुनियादी ढांचे के बजट में कर रहे कटौती

नई दिल्ली | 

केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए दी जाने वाली ‘विशेष सहायता’ को लेकर एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। एसबीआई (SBI) रिसर्च के एक अध्ययन के मुताबिक, यदि केंद्र सरकार राज्यों को विकास कार्यों के लिए 1 रुपया देती है, तो कई राज्य अपने स्वयं के फंड से होने वाले खर्च में 34 पैसे तक की कटौती कर देते हैं। यह स्थिति उन राज्यों में अधिक गंभीर है जहां नकद हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) की योजनाएं हावी हैं।

क्या है केंद्र की SSCI योजना?

अक्टूबर 2020 (महामारी के दौरान) में केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे (सड़क, स्कूल, अस्पताल) के विकास को गति देने के लिए एक योजना शुरू की थी। इसके तहत राज्यों को 50 साल के लिए ब्याज मुक्त कर्ज दिया जाता है। बीते पांच वर्षों में इस योजना के अंतर्गत राज्यों को करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

खर्च में कटौती: घाटे वाले राज्यों की स्थिति खराब

रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों के बीच इस कोष के इस्तेमाल को लेकर काफी असमानता है:

सामान्य कटौती: औसतन राज्य अपने हिस्से के निवेश में 34 पैसे की कटौती कर रहे हैं।

राजस्व घाटे वाले राज्य: जिन राज्यों का राजस्व घाटा ज्यादा है, वे केंद्र से मदद मिलते ही अपने बजट में 55 पैसे की कटौती कर देते हैं।

शर्तों का प्रभाव: बिना शर्त वाले फंड के मामले में राज्य अपने हिस्से के खर्च में सबसे ज्यादा (करीब 67 पैसे) की कमी कर देते हैं।

नकद हस्तांतरण (Cash Transfers) का बोझ

अध्ययन की एक अहम बात यह है कि राज्यों द्वारा नकद हस्तांतरण (Direct Cash Benefits) की योजनाओं में भारी बढ़ोतरी हुई है।

वर्ष 2018-19 से 2025-26 के बीच नकद हस्तांतरण में 53.6% की वृद्धि देखी गई है।

अनुमान है कि 2025-26 तक यह राशि बढ़कर 1.96 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।

कर्नाटक में नकद हस्तांतरण 6 वर्षों में 94 गुना, झारखंड में 47 गुना और पश्चिम बंगाल में 24 गुना बढ़ा है।

इन राज्यों में बढ़ी मुश्किलें

भारी कर्ज और नकद योजनाओं के कारण पंजाब, केरल और तेलंगाना जैसे राज्यों को पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) के लिए संसाधन जुटाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि राज्य केंद्र से मिलने वाले ब्याज मुक्त कर्ज का उपयोग तो कर रहे हैं, लेकिन उसका लाभ बुनियादी ढांचे को मिलने के बजाय, वे उस राशि का उपयोग अपने स्वयं के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए कर रहे हैं।

अध्ययन के मुख्य बिंदु:

34 पैसे: प्रति एक रुपया केंद्रीय सहायता पर राज्यों द्वारा अपने खर्च में की गई औसत कटौती।

कर्नाटक, झारखंड, बंगाल: नकद हस्तांतरण योजनाओं में सबसे आगे रहने वाले राज्य।

लक्ष्य: बुनियादी ढांचे का विकास, लेकिन राज्यों की प्राथमिकता लोकलुभावन योजनाएं बनी हुई हैं।

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