माननीय टीईटी अनिवार्यता पुनर्विचार याचिका पर अब सुनवाई 13 मई को दोपहर 2 बजे से
🔴 TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जंग: 13 मई को ओपन कोर्ट में होगी सुनवाई, लाखों शिक्षकों की नजरें टिकीं
देशभर के लाखों शिक्षकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण TET अनिवार्यता मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली ने इस प्रकरण में दायर रिव्यू याचिकाओं को स्वीकार करते हुए 13 मई 2026 को दोपहर 2 बजे ओपन कोर्ट में सुनवाई तय की है।
इस सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी और अन्य कानूनी विशेषज्ञ शिक्षकों की ओर से अपना पक्ष रखेंगे। शिक्षकों का मुख्य तर्क है कि RTE Act लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET अनिवार्यता लागू नहीं की जा सकती, क्योंकि यह “भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective Effect)” होगा, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मूल मुकदमे में पूरे देश के सभी शिक्षकों पर TET लागू करने की कोई मांग नहीं थी, फिर भी इस तरह का व्यापक प्रभाव डालने वाला निर्णय दिया गया। वहीं, NCTE की गाइडलाइंस में भी स्पष्ट है कि RTE Act से पहले नियुक्त शिक्षक TET से मुक्त रहेंगे।
शिक्षकों ने यह भी सवाल उठाया है कि दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और मौलिक अधिकारों का क्या होगा। “बीच खेल में नियम बदलना” न्यायसंगत नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब नियुक्ति उसी समय की शर्तों के आधार पर हुई हो।
इस मामले में प्रयागराज हाईकोर्ट के पुराने निर्णयों का भी हवाला दिया जा रहा है, जिसमें कहा गया था कि RTE से पहले की भर्तियों पर TET लागू नहीं किया जा सकता।
अब यह सुनवाई करीब 25 लाख शिक्षकों और उनके लगभग 1.25 करोड़ परिजनों के भविष्य से जुड़ी हुई है। सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हैं, जिससे देशभर में शिक्षा व्यवस्था और सेवा शर्तों पर बड़ा असर पड़ सकता है।