फखरपुर, । नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ हार ही स्कूल बैग का बढ़ता बोझ अभिभावकों के बजट पर भारी पड़ रहा है। किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म और अन्य जरूरी सामग्री खरीदने में अभिभावकों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
निजी स्कूलों में निर्धारित दुकानों से ही सामान खरीदने की बाध्यता से खर्च और बढ़ जाता है। अभिभावकों का कहना है कि हर साल किताबों और कॉपियों में बदलाव कर दिया जाता है, जिससे पुराने संसाधनों का उपयोग नहीं हो पाता और नए सिरे से खरीदारी करनी पड़ती है। इसके अलावा भारी बैग बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहे हैं, जिससे पीठ और कंधों में दर्द की शिकायतें बढ़
निर्धारित दुकानों से ही सामान खरीदने को दबाव डालते हैं स्कूल भारी बैग बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहे
रही हैं। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही किताबों, कॉपियों, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्रियों की लंबी सूची ने परिवारों का बजट गड़बड़ा दिया है। अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों में हर साल नई किताबें और कॉपियां अनिवार्य कर दी जाती हैं, जिससे पुरानी किताबों का उपयोग संभव नहीं हो पाता इसके अलावा स्कूल बैग, जूते, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी पर भी भारी खर्च करना पड़ता है।