प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में शिक्षामित्रों को सम्मानजनक गुजारा भत्ता न देने संबंधी मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर राज्य के वकील ने पत्र के माध्यम से पक्ष रखा। कहा, करीब एक लाख 50 हजार शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि का मामला है। अत्यधिक वित्तीय बोझ है। इसलिए वित्त विभाग को सहमति के लिए रिपोर्ट भेजी गई है।

- TET अनिवार्यता पर सुनवाई अपडेट : स्टेट ऑफ त्रिपुरा बनाम सजल देब सुप्रीम कोर्ट अपडेट, मिली अगली डेट
- जूनियर एसिस्टेंट 5369 में ऑनलाइन डीवी के समय विभागों की वरीयता देनी होगी।
- बेसिक शिक्षा विभाग के संगठन द्वारा उठाए जाने योग्य प्रमुख मांगें (जनगणना 2026 के संदर्भ में)
- शिक्षकों के खाली पदों के ब्योरे का फर्जी पत्र वायरल
- बड़ा एक्शन: फरार बीएसए-लिपिक पर शिकंजा, कोर्ट से भगोड़ा घोषित कराने की तैयारी
न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की अदालत वाराणसी के विवेकानंद की अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि 2023 में शिक्षामित्रों को समान कार्य के समान वेतन की मांग करते हुए एक याचिका दाखिल की गई थी। उस पर न्यायालय ने कहा था कि शिक्षामित्रों को भुगतान की जाने वाली मानदेय राशि न्यूनतम है। इसके लिए राज्य एक समिति गठित करे। वित्तीय इंडेक्स के अनुसार जीवन जीने के लिए एक सम्मान जनक मानदेय निर्धारित किया जाए। इस आदेश का पालन नहीं करने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई है। अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।