उन्नाव। जिले में फर्जी अभिलेखों – पर नौकरी करते पकड़े जाने का यह पहला मामला नहीं है। इसके लिए पहले छह शिक्षक ऐसे मिले हैं जिनकी एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर सेवा समाप्त की जा चुकी है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा के बीएड सत्र 2004-05 की जारी फर्जी मार्कशीट की जांच की थी तो 19 नवंबर 2017 में औरास ब्लॉक के शिक्षक इकबाल, मियागंज ब्लॉक में शिक्षक आजाद गुलशन बानो, बीघापुर – ब्लॉक में जीतेंद्र सिंह, सफीपुर में – कंचन यादव और नवाबगंज में यादुवेंद्र सिंह नौकरी करते मिले थे। साल 2020 तक सभी पर जांच चली और एक-एक कर सभी की सेवा समाप्त हुई और रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

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28 मार्च 2021 को सुमेरपुर
ब्लॉक में रहे हरदोई निवासी शिक्षक ओमप्रकाश पर फर्जी अभिलेखों पर नौकरी करने का मामला सामने आया था। सेवा समाप्त कर भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
नौकरी न मिलने पर बदला नाम
उन्नाव। फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी करने के मामले में जांच की गई तो हकीकत सामने आई है। शिकायतकर्ता के मुताबिक नौकरी न मिलने पर प्राची बनकर साल 2011 में हरदोई के काजीपुर फरहतनगर के विमला देवी रवींद्र कुमार इंटर कॉलेज से दोबारा हाईस्कूल किया। जिसका अनुक्रमांक 1310885 है। इंटरमीडिएट की परीक्षा साल 2013 में हरदोई के ही सुखनखेड़ा रसूलपुर के शेख अब्दुल जब्बार पब्लिक इंटर कॉलेज से किया, जिसका अनुक्रमांक-0908737 है। स्नातक हरदोई के कासिमपुर में संचालित संतोष कुमार महाविद्यालय से साल 2016 में पास किया, जिसका अनुक्रमांक-3049378 है। बीटीसी सरोसी के मनोहरलाल महाविद्यालय से साल 2018 में अनुक्रमांक 181300256 से किया। शैक्षिक अभिलेखों में जन्मतिथि 10 अगस्त 1993 दर्ज कराई। (संवाद)