राजकीय विद्यालयों की प्रवक्ता भर्ती में वेटेज का लाभ नहीं
प्रयागराज। राजकीय विद्यालयों में प्रवक्ता भर्ती की नई नियमावली लागू होने से अब एलटी डिप्लोमा या बीएड डिग्रीधारकों को वेटेज (अधिमानी अर्हता) का लाभ नहीं मिलेगा। बीएड की उपाधि को अब भर्ती की अनिवार्य अर्हता में शामिल कर लिया गया है। हालांकि, इस नई नियमावली से उन लाखों अभ्यर्थियों को झटका लगा है, जिनके पास केवल स्नातकोत्तर (पीजी) की डिग्री है। उन्होंने बीएड नहीं किया है।

- विकास खण्ड स्तर पर खण्ड शिक्षा अधिकारियों द्वारा प्रधानाध्यापक के साथ मासिक बैठक आयोजित किये जाने के सम्बन्ध में।
- NPS धारकों को FMA- Grant of fixed medical allowance की सुविधा देने के संबंध में
- केन्द्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 02% की वृद्धि किए जाने से संबंधित वित्त मंत्रालय, भारत सरकार का आदेश जारी
- जनगणना 2027 के मकान सूचीकरण कार्य में लगे शिक्षकों को अर्जित अवकाश (Earned Leave) प्रदान किए जाने के संबंध में -CM को पत्र
- भीषण गर्मी में शिक्षकों को अतिरिक्त समय तक रोकना अव्यवहारिक: शिक्षक संघ का कड़ा विरोध
ऐसे अभ्यर्थी अब प्रवक्ता भर्ती की दौड़ से बाहर हो जाएंगे। वहीं, कुछ विषयों में प्रवक्ता भर्ती के लिए बीएड को अनिवार्य अर्हता के रूप में शामिल नहीं किया गया है। इनमें गृह विज्ञान, वाणिज्य, सैन्य विज्ञान, कला व सिलाई (महिला शाखा) शामिल हैं। प्रवक्ता भर्ती के लिए पहले केवल स्नातकोत्तर की उपाधि अनिवार्य अर्हता होती थी।
राजकीय या मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थान से एलटी डिप्लोमा या भारत में विधि की ओर से स्थापित किसी विश्वविद्यालय से शिक्षाशास्त्र में स्नातक (बीएड) की उपाधि अधिमानी अर्हता होती थी। नई
पहले बीएड था अधिमानी अर्हता, अब अनिवार्य अर्हता में हुआ शामिल
नियमावली में अधिमानी अर्हता की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है और बीएड को अनिवार्य अर्हता में शामिल कर लिया गया है।
प्रवक्ता समाजशास्त्र, भूगोल, अर्थशास्त्र, नागरिकशास्त्र, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, मनोविज्ञान, इतिहास, उर्दू, जीव विज्ञान, संस्कृत व प्रवक्ता कृषि विज्ञान (पुरुष शाखा) में भर्ती के लिए विषय में स्नातकोत्तर की उपाधि और एनसीटीई से मान्यता प्राप्त किसी कोर्स में बीएड की उपाधि को अनिवार्य अर्हता में शामिल कर लिया गया है।
वहीं, प्रवक्ता हिंदी के लिए हिंदी विषय में स्नातकोत्तर, एक विषय के रूप में संस्कृत के साथ कला में स्नातक व बीएडी की डिग्री अनिवार्य अर्हता होगी।
प्रवक्ता फारसी (पुरुष शाखा) के लिए फारसी विषय में स्नातकोत्तर उपाधि या कामिल परीक्षा में उत्तीर्ण होने का प्रमाणपत्र और बीएड की डिग्री अनिवार्य अर्हता होगी। इसी तरह प्रवक्ता शिक्षाशास्त्र में भी पूर्व की अधिमानी अर्हता अब अनिवार्य अर्हता में शामिल कर ली गई है।