राजकीय व अशासकीय महाविद्यालयों में भर्तियों के लिए पांच से सात साल तक का इंतजार
प्रयागराज। अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों और राजकीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक व प्रवक्ता के पदों पर भर्ती के लिए एक समान नियमावली लागू होने के बाद शिक्षकों के तकरीबन 33 हजार पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है।
अभ्यर्थियों की नजर अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग पर है, जिन्हें रिक्त पदों पर भर्तियां पूरी करानी हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग एलटी ग्रेड शिक्षक (सहायक अध्यापक) व प्रवक्ता के कुल 8905 पदों का अधियाचन भेजा जा चुका है, जिनमें एलटी ग्रेड के 7258 पद व प्रवक्ता के 1647 पद हैं।
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एलटी ग्रेड में पुरुष वर्ग के 4785 पदों व महिला वर्ग के 2473 पदों और प्रवक्ता में पुरुष वर्ग के 817 व महिला वर्ग के 2473 पदों पर भर्ती होनी है। नई नियमावली के तहत अर्हता पूरी तरह से स्पष्ट किए जाने के बाद अभ्यर्थियों को अब ये दोनों भर्तियां शुरू होने का इंतजार है। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि आयोग जल्द ही इन भर्तियों के लिए विज्ञापन जारी करेगा।

वहीं, अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक (टीजीटी) व प्रवक्ता (पीजीटी) के कुल 24849 पद रिक्त हैं। इनमें सहायक अध्यापक के 20465 व प्रवक्ता के 4384 पद शामिल हैं। इन पदों पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भर्ती करनी है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग यूपीपीएससी को 8905 पदों पर भर्ती के लिए भेज चुका है अधियाचन
संक सेवा आयोग
हालांकि, आयोग को अभी इन पदों का अधियाचन नहीं मिला है लेकिन आयोग के प्रतिनिधि रिक्त पदों पर भर्ती शुरू करने के लिए तीन बार माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों के साथ बैठक कर चुके हैं।
फिलहाल, अशासकीय व राजकीय विद्यालयों में अब शिक्षक भर्ती के लिए एक समान नियमावली लागू हो जाने से अर्हता का विवाद पूरी तरह से खत्म हो गया है और ऐसे में दोनों आयोगों के सामने भर्ती शुरू करने के लिए कोई बाधा नहीं रह गई है। प्रतियोगी छात्र मोर्चा के अध्यक्ष विक्की खान का कहना है कि राजकीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक की सात साल से नई भर्ती नहीं आई है।
वहीं, प्रवक्ता के पदों पर भर्ती के लिए वर्ष 2020 के बाद कोई नया विज्ञापन जारी नहीं हुआ। इसी तरह अशासकीय विद्यालयों टीजीटी व पीजीटी के पदों पर वर्ष 2022 के बाद से नया विज्ञापन नहीं आया है। अशासकीय व राजकीय विद्यालयों में एक समान नियमावली लागू होने से अर्हता का विवाद नहीं रह गया है। ऐसे में दोनों आयोग को भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू कर देनी चाहिए।