प्रदेश के 171 राजकीय महाविद्यालयों में अब केवल गोला भरकर अभ्यर्थी असिस्टेंट प्रोफेसर (प्रवक्ता) नहीं बन सकेंगे। असिस्टेंट प्रोफेसर के 562 पदों पर शुरू होने जा रही भर्ती को और अधिक पारदर्शी बनाने के मकसद से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने पूरी चयन प्रक्रिया में बड़े बदलाव का निर्णय लिया है। अब स्क्रीनिंग परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्नों की बजाय विस्तृत उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे और इसके अंक अंतिम परिणाम में भी जुड़ेंगे।

पूर्व में अभ्यर्थियों की छंटनी के मकसद से होने वाली स्क्रीनिंग परीक्षा में केवल बहुविकल्पीय प्रश्न होते थे और उसके बाद साक्षात्कार के आधार पर चयन होता था। पहले स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक अंतिम परिणाम में नहीं जोड़े जाते थे। अब स्क्रीनिंग परीक्षा के 75 प्रतिशत अंक और साक्षात्कार के 25 फीसदी अंकों को मिलाकर श्रेष्ठता सूची (मेरिट) बनाई जाएगी और उसके आधार पर चयन होगा।
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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न के माध्यम से अभ्यर्थी की विषय पर पकड़ और समझ का परीक्षण हो सकेगा। चूंकि असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे पद पर चयन हो रहा है इसलिए साक्षात्कार की तुलना में लिखित परीक्षा को अधिक महत्व देने का निर्णय लिया गया है।
आयोग की ओर से बदलाव के संबंध में प्रस्ताव उच्च शिक्षा विभाग लखनऊ को भेजा गया था। उच्च शिक्षा विभाग ने इस पर उच्च शिक्षा निदेशालय की राय मांगी थी। सूत्रों के अनुसार उच्च शिक्षा निदेशालय ने इस संशोधन को मंजूरी दे दी है और अब शासन से अनुमति मिलने के बाद जल्द ही विज्ञापन जारी होगा। इससे पहले 2020 में असिस्टेंट प्रोफेसर के 128 पदों पर भर्ती आई थी।
23 विषयों में िकया जाएगा चयन
उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से प्रदेश लोक सेवा आयोग को 23 विषयों में 562 रिक्त पदों का ऑनलाइन अधियाचन भेजा गया है। इसमें वाणिज्य के सर्वाधिक 65 पद हैं। अंग्रेजी 47, समाजशास्त्र 43 और रसायन विज्ञान व हिन्दी में 41-41 पद हैं। अर्थशास्त्र 37, वनस्पति विज्ञान, जन्तु विज्ञान, गणित व शारीरिक शिक्षा के 33-33, राजनीति विज्ञान 29, इतिहास, 23, भूगोल 22, गृह विज्ञान 20, मनोविज्ञान व संस्कृत के 17-17 और भौतिकी के 14 पद खाली हैं। शिक्षाशास्त्र छह, उर्दू, संगीत वादन व सांख्यिकी के एक-एक, कंप्यूटर साइंस व पर्सियन के एक-एक पद हैं।