लखनऊ- आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र ने होम्योपैथी निदेशक प्रो अरविंद कुमार वर्मा को किया निलंबित, ट्रांसफर,पोस्टिंग में भारी अनियमितता का उन पर है आरोप !!
तबादलों में गड़बड़ी पर होम्योपैथी विभाग के निदेशक निलंबित
एके वर्मा पर दायित्व के निर्वहन में लापरवाही का आरोप, निलंबित निदेशक ने कहा- खुद को बचाने के लिए उन्हें बनाया आरोपी
लखनऊ। होम्योपैथी विभाग में तबादलों को लेकर चल रहे विवाद में आखिरकार विभाग के निदेशक प्रो’ एके वर्मा को निलंबित कर दिया गया है। उन्हें निलंबन अवधि में राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज गाजीपुर से – संबद्ध किया गया है।
आयुष विभाग के प्रमुख सचिव – रंजन कुमार ने प्रो वर्मा को निलंबित करने का आदेश बुधवार देर रात जारी कर दिया। इसमें प्रो. वर्मा पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पदीय दायित्व का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया। भ्रामक तथ्यों को प्रस्तुत कर दिग्भ्रमित किया। शिथिल एवं संवेदनहीन कार्यशैली रही।
फिलहाल इस कार्रवाई की पटकथा तबादले के दौरान ही लिख दी गई थी। होम्योपैथी विभाग में लंबे समय से तबादला रुका हुआ है। इस वर्ष तबादला सूची तैयार करके
मेरे खिलाफ गलत तरीके से की गई कार्रवाई
मेरे ऊपर मनमानी तरीके से आरोप लगाए जा रहे हैं। जहां तक तबादले का मामला है तो उसके लिए गाइडलाइन जारी की गई थी। संबंधित गाइडलाइन के आधार पर ही सूची तैयार की गई। कुछ लोग अपनी गर्दन बचाने के लिए मुझे पूरे मामले में जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। मेरे खिलाफ गलत तरीके से कार्रवाई की गई है। इसके खिलाफ अदालत में गुहार लगाएंगे।
प्रो. एके वर्मा
आयुष राज्यमंत्री के पास भेजी गई। कुछ पदों पर 14 और 15 जून दोपहर तक अलग-अलग संवर्ग के तबादला आदेश जारी हो गए थे, लेकिन देर रात सभी तबादले निरस्त कर दिए गए। अंदरखाने में यह भी चर्चा है कि आयुष राज्यमंत्री, विभाग के आला अधिकारियों एवं
डॉक्टरों पर कड़ाई की वजह से भी निशाने पर रहे प्रो वर्मा
लखनऊ। होम्योपैथी विभाग के निदेशक प्रो. एके वर्मा को निलंबित करने के पीछे कई अहम वजहें हैं। वे डिजिटल हाजिरी को लेकर निरंतर डॉक्टरों के निशाने पर रहे। तबादला आदेश जारी होने के बाद शिकायतों का दौर बढ़ा और फिर वे निशाने पर आ गए।
फर्जी नियुक्ति से लेकर डिस्पेंसरी से डॉक्टरों के गायब रहने की शिकायतों के बीच होम्योपैथी विभाग के निदेशक के रूप में 2022 में प्रो. एके वर्मा को जिम्मेदारी मिली। इससे पहले वह राजकीय नेशनल होम्योपैथिक कॉलेज, लखनऊ में प्रधानाचार्य थे। कार्यभार ग्रहण करते
होम्योपैथी निदेशक के बीच तबादले को लेकर तनातनी हुई थी। कुछ डॉक्टरों ने निदेशक पर अनियमितता के आरोप भी
