गोरखपुरः जिला अस्पताल की इमरजेंसी में उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक की मृत्यु पर जमकर हंगामा हुआ। स्वजन ने इमरजेंसी में तैनात डा. शहनवाज पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। कहा कि डा. शहनवाज ने शिक्षक को देखा ही नहीं। स्वजन के अनुरोध के बाद भी वह कुर्सी से नहीं उठे। हंगामा की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को मोर्च्यूरी में रखवा दिया है।
शिक्षक सुरेश पाठक फाइल फोटो
उरुवा ब्लाक के बेलपार पाठक निवासी 52 वर्षीय सुरेश पाठक चारपान गांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय द्वितीय में शिक्षक थे। वह शनिवार को विद्यालय में छात्रों को पढ़ा रहे थे। वहां उनके चक्कर आया और तबीयत बिगड़ी तो साथी शिक्षकों ने आराम की सलाह दी। इसके बाद वह आटो से रुस्तमपुर स्थित किराए के मकान में आ गए। बीएड के बाद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे बेटे हिमांशु पाठक ने बताया कि घर
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डाक्टर पर स्वजन ने लगाया लापरवाही का आरोप

छोटा बेटा पुलिस में हुआ है चयनित
सुरेश पाठक के दो बेटे और एक बेटी है। छोटा बेटा आदित्य पाठक इस बार पुलिस की भर्ती में सफल हुआ है। इस समय उसका प्रशिक्षण चल रहा है। पिता की मृत्यु की सूचना मिलते ही वह भी घर के लिए रवाना हो गया है।
पहुंचने पर तबीयत बिगड़ी तो तत्काल जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। यहां पहले तो ह्वीलचेयर नहीं मिला।
स्ट्रेचर से इमरजेंसी के अंदर ले गए। यहां तैनात डा. शहनवाज ने कुर्सी भी नहीं छोड़ी। बाद में मृत घोषित कर दिया। जब हम इमरजेंसी पहुंचे तो पिता जी बातचीत कर रहे थे। इमरजेंसी में लापरवाही से मृत्यु की सूचना पर सौ से ज्यादा लोग पहुंच गए। स्थिति बिगड़ता देख चिकित्सा अधीक्षक डा. बीके सुमन मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत
बेलीपार के चारपान गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय द्वितीय में शिक्षक थे सुरेश पाठक
जिला अस्पताल में मौजूद रहे शिक्षक
सुरेश पाठक की मृत्यु की सूचना मिलते ही भारी संख्या में शिक्षक भी जिला अस्पताल पहुंच गए। इनमें शिक्षक नेता वशिष्ठ त्रिपाठी, महेंद्र नाथ चतुर्वेदी, लक्ष्मीकांत पांडेय, वरुणेश कुमार त्रिपाठी, अमित राय आदि शामिल रहे।
कराया। डा. बीके सुमन ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी।
जिला अस्पताल के डा. शहनवाज ने कहा कि सुरेश पाठक इमरजेंसी में आए तो डा. मनोज ने उनका परीक्षण किया। तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
डा. मनोज ने इसकी जानकारी स्वजन को दे दी थी। इसके बाद स्वजन मेरे पास आए तो मैंने भी परीक्षण किया। इमरजेंसी में कोई लापरवाही नहीं हुई है। पूरा प्रकरण सीसी कैमरे में रिकार्ड है। पाठक हृदय के रोगी थे। उनको मधुमेह भी