प्रयागराज। संभल, बलरामपुर और मुजफ्फरनगर के एडेड कॉलेजों में फर्जी पैनल से नियुक्ति करने के मामले में विजिलेंस ने माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड प्रयागराज के पूर्व उपसचिव, तीन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस), 10 प्रधानाचार्य, आठ प्रबंधक और मुजफ्फरनगर के तत्कालीन गन्ना अधिकारी समेत 48 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

आरोप है कि फर्जी तरीके से पैनल बनाकर अभ्यर्थियों को अलग-अलग कॉलेज में नियुक्ति (सहायक अध्यापक) दी गई। इस संबंध में विजिलेंस इंस्पेक्टर हवलदार सिंह की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है।
शासन की ओर से विजिलेंस प्रयागराज को मई-2023 में खुली जांच के आदेश दिए गए थे। जांच में पाया गया कि स्नातक शिक्षकों की नियुक्ति के
लिए वर्ष 2013 में विज्ञापन निकाला गया। इसमें कई अभ्यर्थी चयनित नहीं हुए। इसके बावजूद फर्जी पैनल बनाकर उन्हें नियुक्ति दिला दी गई। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों ने कई वर्षों तक वेतन भी प्राप्त किया। आरोप है कि इस खेल में डीआईओएस, सहायक पटल प्रबंधक और प्रधानाचार्य शामिल थे।
नियमानुसार माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड प्रयागराज किसी भी चयनित
या समायोजित अभ्यर्थी का पैनल सबसे पहले बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करता है। इसके बाद संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक को रजिस्टर्ड डाक और अधिकारिक ई-मेल के माध्यम से सूचना देता है। पैनल को सत्यापित करने की जिम्मेदारी जिला विद्यालय निरीक्षक की होती है, लेकिन इसमें फर्जीवाड़ा कर 23 अभ्यर्थियों को फर्जी पैनल के जरिये नियुक्ति दी गई।
जांच में पता चला कि फर्जी पैनल से अभ्यर्थी विवेक कुमार शुक्ला, राजकुमार और विकास तिवारी को बिना सत्यापित किए ही मुजफ्फरनगर के बरला इंटर कॉलेज में कार्यभार ग्रहण करने का पत्र प्रेषित कर दिया गया। उक्त अभ्यर्थियों ने क्रमशः स्नातक विज्ञान, स्नातक हिंदी और स्नातक सामाजिक विज्ञान के लिए आवेदन किया था। बिना परीक्षा उत्तीर्ण किए ही तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक गजेंद्र कुमार, पटल सहायक प्रमोद कुमार शर्मा ने उक्त अभ्यर्थियों को पद ग्रहण करा दिया। इसके अलावा दीपिका सिंह, अमित कुमार श्रीवास्तव, संजय कुमार दुबे, मृत्युंजय यादव को भी कार्यभार ग्रहण करा दिया गया।