Home PRIMARY KA MASTER NEWS संपूर्ण विवरण: पदोन्नति टीईटी नौकरी✍️पार्ट 1.

संपूर्ण विवरण: पदोन्नति टीईटी नौकरी✍️पार्ट 1.

by Manju Maurya

*संपूर्ण विवरण: पदोन्नति टीईटी नौकरी*

पार्ट 1. 

तमिलनाडु सरकार शिक्षकों की पदोन्नति कर रही थी। यहां तक कि वह ऐसे शिक्षकों की भी पदोन्नति कर रही थी जो कि प्राथमिक विद्यालय में प्राथमिक स्तर की टीईटी उत्तीर्ण होकर नियुक्ति पाए थे अर्थात इनकी नियुक्ति वर्ष 2010 से 2020 के बीच हुई थी। मगर इनको उच्च प्राथमिक विद्यालय में भेज रही थी और ये उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी उत्तीर्ण नहीं थे।

तमिलनाडु के प्राथमिक विद्यालय के उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों एवं बेरोजगारों ने कहा कि वे उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी उत्तीर्ण हैं उनकी पदोन्नति/नियुक्ति की जाए। बगैर टीईटी उत्तीर्ण की पदोन्नति न की जाए। 

तमिलनाडु सरकार ने कहा कि वह नियुक्ति में तो एनसीटीई के नोटिफिकेशन 23/08/2010 और संशोधित नोटिफिकेशन 29/07/2011 को लागू करेंगे अर्थात नई नियुक्ति के टीईटी लागू करेंगे लेकिन पदोन्नति करना राज्य सरकार के सर्विस रूल का मामला है। शिक्षकों का यह अधिकार है कि उनकी पदोन्नति हो उनकी नियुक्ति के साथ ही उनका पदोन्नति का अधिकार हैं। 

टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक और बेरोजगार माननीय मद्रास उच्च न्यायालय गए और बिना टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक जो कि बिना टीईटी पदोन्नति चाहते थे उन्होंने भी अपने बचाव में पैरवी किया कि उनकी बिना टीईटी पदोन्नति हो।और अंततः माननीय मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि उच्च प्राथमिक स्तर में जाने के लिए उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी उत्तीर्ण होना जरूरी है। 23/08/2010 के बाद यदि आपके पद में परिवर्तन होता है तो पद जो नया पद का स्वरुप धारण कर रहा है उस स्तर की टीईटी आपके पास हो। जबकि सेवा में बने रहने के लिए टीईटी नहीं देना है। यह जजमेंट 02/06/2023 को माननीय मद्रास उच्च न्यायालय ने जारी किया था। इस जजमेंट को तमिलनाडु सरकार और RTE एक्ट लागू होने के पूर्व के शिक्षकों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुज्ञा याचिका में चुनौती दिया। डॉक्टर अभिषेक मनु सिंघवी जी ने तमिलनाडु सरकार और बिना टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों की पैरवी किया लेकिन मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक नहीं लगवा सके परंतु टीईटी उत्तीर्ण बेरोजगार और टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों के ऊपर नोटिस जारी करा दिया। 

अब डॉक्टर सिंघवी नोटिस न जारी करा पाए तो फिर कौन उनके पास जायेगा। मैं चाहता था कि यह SLP खारिज हो जाए मगर तमिलनाडु सरकार की जिद यहां बाधक बनी। 

बात उत्तर प्रदेश की करें तो ..

वर्ष 2017 से ही मै चाहता था कि जिनकी नियुक्ति बिना टीईटी हुई है उनकी पदोन्नति बिना टीईटी हो जाए और जो 23/08/2010 के बाद नियुक्त हुए हैं वह पदोन्नति में टीईटी उत्तीर्ण हो।

अचानक दीपक शर्मा ने रिट किया कि एनसीटीई का नोटिफिकेशन 12/11/2014 पदोन्नति में लागू किया जाए। न्यायमूर्ति श्री अश्विनी मिश्रा साहब ने उनकी रिट एलाऊ कर दिया। 

उस आदेश में कोई भी कमी नहीं थी। 

मैने सोचा कि चलो ठीक है… अब क्या कहा जाए। 

सूबेदार यादव ने रिट किया कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक/प्रधानाध्यापक के बहुत पद रिक्त हैं। उत्तर प्रदेश में कोई भी ऐसा टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक मौजूद नहीं है जो कि उच्च प्राथमिक विद्यालय में दो वर्ष से और प्राथमिक विद्यालय में पांच वर्ष से अधिक समय से काम कर रहा हो। अतः बिना टीईटी उत्तीर्ण लोगों की पदोन्नति कर दी जाए। माननीय एकल पीठ के न्यायमूर्ति ने दीपक शर्मा केस का आदेश लगाकर रिट खारिज कर दिया कि वही आदेश लागू होगा। सूबेदार यादव स्पेशल अपील में गए और स्पेशल अपील भी खारिज हो गई। 

इसके बाद भीष्मपाल और माबूद आलम ने दीपक शर्मा केस का न्यायमूर्ति श्री अश्विनी मिश्रा जी का एकल पीठ का फैसला ही डिवीजन बेंच में चैलेंज कर दिया। मैने सोचा कि ये लोग क्यों आग से खेल रहे हैं। फिर मुझसे क्या मतलब था। मैं वर्ष 2022 तक तो इस विषय पर कोई अधिकार ही नहीं रखता था। 

न्यायमूर्ति श्री ए पी शाही साहब की डिवीजन बेंच ने न्यायमूर्ति श्री अश्विनी मिश्रा साहब का एकल पीठ का फैसला रद्द करके सभी प्रभावित पक्ष को डायरेक्ट किया कि सब लोग एकल पीठ में जाकर अपना पक्ष रखो और एकल पीठ फिर से सबको सुनेगी। 

पूर्व में नियुक्ति मामले में शिव कुमार शर्मा केस में न्यायमूर्ति शाही साहब की वृहदपीठ ने टीईटी का वेटेज अनिवार्य किया था जिसके कारण अखिलेश सरकार का 72825 विज्ञापन डिवीजन बेंच ने रद्द कर दिया था और मायावती सरकार के विज्ञापन में टीईटी मेरिट थी इसलिए उसे बहाल कर दिया था। जबकि मायावती सरकार के विज्ञापन में टीईटी मेरिट के अलावा कुछ भी बेसिक शिक्षा नियमावली से नहीं था। जब मायावती सरकार के पास बीएड को नौकरी देने का मात्र तीन महीने समय शेष था। क्योंकि 1 जनवरी 2012 को बीएड को नौकरी देने की अंतिम तिथि थी। 

दिनांक 27/09/2011 को 72825 का शासनादेश एकेडमिक मेरिट से भर्ती करने के लिए आ चुका था। मगर उसका चयन का आधार मुझे चयन से बाहर कर रहा था। मेरी मांग थी कि टीईटी के बाद एक और नौकरी में चयन की परीक्षा कराई जाए तब विभाग ने कहा कि एक टीईटी परीक्षा कराने का समय नहीं है दो परीक्षा कैसे होगी। तब एनसीटीई के गाइडलाइन 11/02/2011 की क्लॉज 9b के आधार पर मैने कहा कि राज्य सरकार चाहे तो चयन में टीईटी का वेटेज जोड़ सकती है। पूरा टीईटी अंक भी तो तब दिया जा सकता है। दिनांक 09/11/2011 को बेसिक शिक्षा नियमावली में 12 वाँ संशोधन चयन का आधार टीईटी मेरिट हो गया। 13 नवंबर को परीक्षा हुई । 25 नवंबर को टीईटी का रिजल्ट आया था। 30 नवंबर को विज्ञापन आया तो वह भी सर्विस रूल पर नहीं था। फिर क्या क्या हुआ सबको पता है। बहुत लिख चुका हूं और कई बार लिख चुका हूं अतः विषय से नहीं भटकना चाहता हूं। 

शिव कुमार शर्मा केस के नियुक्ति में टीईटी अनिवार्यता, 23/08/2010 से टीईटी लागू होने और टीईटी के वेटेज के कारण बिना वेटेज की उत्तर प्रदेश की कुल 99000 शिक्षकों की नियुक्ति माननीय उच्च न्यायालय के CJ भोसले साहब जी द्वारा रद्द कर दी गई थी और कहा गया था कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय में जाओ और वहां का आदेश आने तक काम करते रहें । जिसे कि उत्तर प्रदेश सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एनसीटीई से ओरल स्टेटमेंट दिलवाकर बचाया था। उस समय राकेश मिश्रा बेसिक शिक्षा परिषद के AOR थे। उस समय मैं भी 99000 लोगों की नौकरी को बचाना चाहता था। एनसीटीई की वकील आशा गोपालन नायर मैडम ने कहा कि राज्य सरकार चाहे तो टीईटी का वेटेज दे , न चाहे तो न दे, वेटेज बाध्यकारी नहीं है। 99000 लोगों की नौकरी बच गई। जिसमें कि मिडिल की गणित/ विज्ञान की 29334 भर्ती भी शामिल थी। इनको लेकर कुल लगभग 99000 शिक्षक हो रहे थे। अखिलेश सरकार का 72825 का विज्ञापन भी बहाल हो गया था लेकिन उसका पद तो माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने मायावती सरकार के विज्ञापन से 66655 पदों तक भरवा दिया था। इसलिए रिलीफ मोल्ड कर दिया। 6170 बचा पद राज्य सरकार पर छोड़ दिया था कि जैसी इच्छा हो भरो। 

बेसिक शिक्षा नियमावली का 12वाँ संशोधन रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को सही ठहरा दिया था। 

इस टीईटी में इतनी ताकत थी कि संविधान के अनुच्छेद 14, 16 सबके उलंघन से हुई 66655 लोगों की नौकरी बच गई थी और अखिलेश सरकार का विज्ञापन नष्ट हो गया। 

मुद्दे पर आते हैं कि दीपक शर्मा केस की पुनः सुनवाई होनी थी। मगर न्यायमूर्ति श्री अश्विनी मिश्रा ने फिर उस केस की कभी सुनवाई नहीं की। कुछ नई रिट कराई तो जाकर उसी केस में कनेक्ट हो जाती थी। 

मुझसे बहुत लोगों ने कहा कि भैया पदोन्नति होना जरूरी है। मैने कहा कि दिनांक 10 फरवरी 2021 के बाद मै इसपर प्रयास करूंगा लेकिन मैं चाहता हूं कि जिसकी नियुक्ति 23/08/2010 के पहले हो चुकी है उसकी पदोन्नति बिना टीईटी हो। क्योंकि इनपर टीईटी लगाओगे तो पदोन्नति नहीं हो पाएगी क्योंकि न्यायमूर्ति श्री शाही जी ने इनको सुनकर एकल पीठ को जजमेंट देने को कहा है। बिना इनको सुने इनपर टीईटी नहीं लग सकता है। लोगों ने मेरी बात मान ली। 

निर्भय सिंह, मोहम्मद अरशद आदि लोग तमाम शिक्षक शिक्षिकाओं के साथ सरकार और विभाग से मिलने लगे और पदोन्नति की मांग करते। 

तमाम जिलों में लोग BSA ऑफिस में पदोन्नति की मांग को लेकर धरना देते। सरकार और विभाग कहता कि मामला कोर्ट में है तो इन सबने बताया कि 23/08/2010 के पहले वालों का मामला कोर्ट में है कि उनको पदोन्नति के लिए टीईटी देना है कि नहीं देना है। 

आप 23/08/2010 के पहले वालों को पदोन्नति में टीईटी से राहत दे दीजिए। 

सरकार विभाग तैयार हो गया। 31 जनवरी 2023 को पदोन्नति और वरिष्ठता सूची का सर्कुलर जारी हो गया। 

मेरा कोई इंटरेस्ट नहीं था क्योंकि मुझसे ऊपर लगभग दो हजार शिक्षक/शिक्षिका थे। मैं चाहता था कि कैसे भी करके पदोन्नति हो जाए। 29/07/2011 तक वालों को भी टीईटी से राहत देना पड़े तो राहत मिल जाए। क्योंकि मेरी कोई दिलचस्पी ही नहीं थी। मैं जानता था कि जिनको मुझ जैसा इमोशनल आदमी बिना टीईटी पदोन्नति दिलाना चाहता है क्योंकि वो जिद पर अड़े हैं और दीपक शर्मा केस के फैसले से सहमत नहीं हो पा रहे जबकि वो बिना टीईटी पदोन्नति के हकदार नहीं थे। 

अचानक सुना कि पीयूष पांडे बाबा ने मोहम्मद अरशद के साथ मिलकर लखनऊ में रिट किया है कि बिना टीईटी पदोन्नति हो रही है और इलाहाबाद में विवेक मिश्रा ने रिट किया है कि बिना टीईटी पदोन्नति हो रही है।

इस दौर में मेरी नजर माननीय मद्रास उच्च न्यायालय में हो रही सुनवाई पर भी थी। जिसकी हर एक सुनवाई से अपडेट रहता था। 

पीयूष बाबा ने अपनी याचिका में यह लिखा था कि मात्र 23/08/2010 के पहले वालों को ही पदोन्नति से छूट दी जाए। इस तरह वह अपने वादे से मुकरे नहीं थे। 

सचिव साहब ने कहा कि मैं पदोन्नति करते समय एनसीटीई के नोटिफिकेशन और गाइडलाइंस फॉलो करूंगा यह मेरा वचन है। याचिका डिस्पोज ऑफ हो गई। 

मगर इलाहाबाद में अशोक खरे बाबू जी ने विवेक मिश्रा की याचिका पर कहा कि हमें विभाग बताए कि पदोन्नति में टीईटी कैसे कैसे और किस किस पर किस तरह लागू की जाएगी। मुझे संधान बताया जाए। 

बाबू जी दीपक शर्मा केस के भी वकील थे। उन्होंने ही पदोन्नति में टीईटी का आदेश कराया था। जिसे कि डिवीजन बेंच ने रद्द करके फिर से एकल पीठ को सुनने का निर्देश दिया था। 

विवेक मिश्रा केस में एनसीटीई का काउंटर आया कि एनसीटीई के नोटिफिकेशन के 23/08/2010 के पैरा 4 में वर्णित है कि छूट किसको मिली है। 

इधर मैं प्रार्थना कर रहा था कि उत्तर प्रदेश में मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले के पहले पदोन्नति हो जाए। 

वरिष्ठता सूची जारी हुई तो उसमें टीईटी उत्तीर्ण होने का जिक्र नहीं था। इसपर टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों ने कहा कि ज्ञापन दिया जाए और विवेक सिंह जी के नेतृत्व में ज्ञापन दिया गया तो उसका निस्तारण करते हुए BSA ऑफिस ने कहा कि बेसिक शिक्षा नियमावली की धारा 18 में पदोन्नति में टीईटी का जिक्र नहीं है इसलिए बिना टीईटी पदोन्नति होगी। 

मजबूरन इस पत्र को चैलेंज करना पड़ा कि एनसीटीई का नोटिफिकेशन और गाइडलाइन बेसिक शिक्षा नियमावली पर फोर्सफुली लागू है। दिनांक 26 अप्रैल 2023 को पहली सुनवाई हुई और 03 मई 2023 को

सचिव साहब ने फिर कहा कि यह अभी वरिष्ठता सूची है। पदोन्नति नहीं हो रही है। पदोन्नति में एनसीटीई का नोटिफिकेशन और गाइडलाइंस फॉलो की जाएगी। 

माननीय उच्च न्यायालय ने लिबर्टी दिया कि एनसीटीई नोटिफिकेशन और गाइडलाइंस फॉलो न हो तो फिर कोर्ट आ सकते हैं। इस याचिका में भी याची (मेरे) के वकील ने लिखा कि 23/08/2010 के पूर्व नियुक्त लोगों को ही पदोन्नति में टीईटी से राहत दी जाए। 

इसके बाद दिनांक 02 जून 2023 को माननीय मद्रास उच्च न्यायालय का जजमेंट आ गया कि पदोन्नति में टीईटी सबपर अनिवार्य है, नियुक्ति चाहे RTE एक्ट लागू होने के पूर्व की ही क्यों न हो। मात्र सेवा में बने रहने के लिए टीईटी नहीं देना है। 

एनसीटीई ने माननीय उच्च न्यायालय के फैसले के अनुपालन में पत्र भी जारी कर दिया। 

उसी दिन जो भावनात्मक पक्ष था कि दिनांक 23/08/2010 के पहले वालों को पदोन्नति में टीईटी से राहत मिले। यह विधिक रूप से खत्म हो गया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय में तमिलनाडु सरकार के जाने के बाद सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश में मैने बताया कि अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा राहत देने के बाद ही 23/08/2010 के पहले नियुक्त लोगों को टीईटी से राहत मिल पाएगी। 

दिनांक 29/12/2023 को पत्र आया कि 06 जनवरी 2024 को पदोन्नति होगी और 12 जनवरी 2024 को म्यूचुअल ट्रांसफर होगा। शिक्षकों ने मांग किया कि पहले म्यूचुअल ट्रांसफर हो तब पदोन्नति हो। 

एक इंसान ने मुझे बदनाम किया कि मैं 23/08/2010 के पहले वालों को पदोन्नति में टीईटी से राहत दिलाना चाहता हूं। जबकि शुरुआत में टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों ने यह विचार रखा था तब यह सोच उत्पन्न हुई थी। 

क्योंकि बिना दीपक शर्मा केस के निस्तारण के दिनांक 23/08/2010 के पहले के नियुक्त गैर टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक पदोन्नति प्रक्रिया न होने देते। 

मगर 02 जून 2023 के मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले के बाद यह अघोषित विचार खत्म हो चुका था। मात्र उनको नौकरी करने का अधिकार शेष बचा था। 

लिबर्टी का लाभ लेकर मैने रिट किया और पदोन्नति पर रोक लग गई। मगर इस रिट में भी मैने इस लाइन को नहीं हटाया कि 23/08/2010 के पहले वालों को टीईटी से राहत दी जा सकती है। क्योंकि तमिलनाडु सरकार की SLP पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन था। बेशक यह सत्य है कि माननीय मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक नहीं लगी थी। 

मुझे बदनाम करने वाले इंसान ने मुझपर आरोप लगाया कि मेरा इनके (दिनांक 23/08/2010 के पूर्व नियुक्त लोगों) प्रति सॉफ्ट कॉर्नर है। इसने भी बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 के रूल 18 को वायरल चैलेंज किया । मुझे जितना बदनाम कर सकता था किया। डिवीजन बेंच में रिट करके पदोन्नति रोकने का श्रेय लेने लगा और विधानसभा में सरकार उसी का नाम लिखकर जवाब देती थी कि इसी की रिट के कारण पदोन्नति रुकी है जबकि एनसीटीई का नोटिफिकेशन जब बेसिक शिक्षा नियमावली पर फोर्सफुली लागू है इस रिट की जरूरत ही नहीं थी। नईम अहमद ने भी इलाहाबाद में रूल में पदोन्नति में टीईटी लाने को लेकर रिट की थी। 

इलाहाबाद में विवेक मिश्रा में आए एनसीटीई के काउंटर को आधार बनाकर शिव कुमार पांडेय ने एकल पीठ से बिना टीईटी नियुक्त 23/08/2010 के पहले नियुक्त शिक्षक को पदोन्नति में टीईटी से राहत दिलवा दी। 

इस आदेश को मैने इलाहाबाद में स्पेशल अपील में SPLAD 371/2024 के नाम से चैलेंज किया। एनसीटीई ने काउंटर दाखिल किया कि पदोन्नति में टीईटी से किसी को भी छूट नहीं है। अपील आज भी पेंडिंग है। जल्द ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश उस अपील में भी हो जायेगा। 

माननीय सर्वोच्च न्यायालय में तमिलनाडु की SLP में इंटरवेंशन एप्लीकेशन फाइल किया वह अपील जनवरी 2025 में CA 1390/2025 में कन्वर्ट हो गई थी। 

मैने अपनी एप्लीकेशन के विंदु 14 में दिनांक 23/08/2010 के पहले नियुक्त शिक्षकों को बिना टीईटी नौकरी में बने रहने का भी पक्ष लिया क्योंकि तमिलनाडु सरकार और वहां के 29/07/2011 के पूर्व के नियुक्त शिक्षक यहां तक कि वर्तमान तक के टीईटी से नियुक्त शिक्षक भी जो अगले संवर्ग की टीईटी नहीं उत्तीर्ण थे बिना टीईटी पदोन्नति मांग रहे थे। मैने स्पष्ट किया कि मगर पदोन्नति के लिए टीईटी से छूट किसी को नहीं है। 

जब मेरे ऊपर यह आरोप है कि मेरा सॉफ्ट कॉर्नर था कि इनको बिना टीईटी पदोन्नति दी जाए तो मैं इनकी नौकरी को लेकर तो खुलेआम चिंतित हूं। 

माननीय सर्वोच्च न्यायालय में उत्तर प्रदेश से सरोज कुमारी ने भी एप्लीकेशन फाइल किया था कि उनको टीईटी से पदोन्नति में छूट दी जाए और बेसिक शिक्षक का सर्वोच्च पद प्राप्त करने दिया जाए। इनका पक्ष राकेश मिश्रा ने रखा था। 

उत्तर प्रदेश सरकार के वकील श्री अंकित गोयल जी ने भी इंटरवेंशन एप्लीकेशन फाइल किया था इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार यह नहीं कह सकती है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के जजमेंट से वह अनभिज्ञ है। अब कोई दूसरे अंकित गोयल या वही अंकित गोयल हों किसी प्राइवेट पार्टी की तरफ से एप्लिकेशन किए हो तो अलग विषय है। 

अप्रैल 2025 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय का जजमेंट रिजर्व होने के बाद शिव कुमार पांडेय जी अपने विरूद्ध फाइल मेरी स्पेशल अपील पर सुनवाई करवाना चाहते थे तो मैने माननीय उच्च न्यायालय से कहा कि मेरे प्रश्न माननीय सर्वोच्च न्यायालय में सुने जा चुके हैं जजमेंट रिजर्व हो चुका है तो माननीय न्यायमूर्ति श्री अश्विनी मिश्रा जी ने उसपर अंतरिम आदेश किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के जजमेंट के बाद एप्लीकेंट एप्लीकेशन फाइल करके सुनवाई करवा सकता हूं …

माननीय सर्वोच्च न्यायालय का जजमेंट 1 सितंबर 2025 को जारी हो चुका है। 

शेष अगले भाग में …

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