उपरोक्त विषयक आप समस्त अवगत हों कि, सचिव, उ०प्र० बेसिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के पत्रांक-बे०शि०प०/34903-982/2022-23 दिनांक 19.02.2023 द्वारा निर्गत शासनादेश के क्रम में यह निर्देशित किया गया है कि जूनियर बेसिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की ज्येष्ठता का निर्धारण नियमावली में वर्णित प्रावधानों के अनुसार किया जाए। उक्त शासनादेश में स्पष्ट रूप से यह व्यवस्था की गई है कि “किसी संवर्ग में किसी भी अध्यापक की ज्येष्ठता उसकी मौलिक नियुक्ति की तिथि से निर्धारित होगी। यदि किसी तिथि को दो या अधिक अध्यापकों की नियुक्ति हुई हो, तो उनकी ज्येष्ठता उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली, 1981 के नियम-17 अथवा नियम-18 के अनुसार, शैक्षिक अभिलेखों अथवा निर्धारित सूची के क्रम में अवधारित की जाएगी।”
निरीक्षणो एवं अभिलेखीय जांच से प्रकाश में आया है कि, विकास खण्ड निघासन के अंतर्गत संचालित कतिपय विद्यालयों में शासनादेश की अवहेलना करते हुए कनिष्ठ अध्यापकों को विद्यालय का प्रशासनिक प्रभार सौंपा गया है। यह स्थिति पूर्णतः नियमविरुद्ध एवं शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यालयीय अनुशासन के प्रतिकूल है। विद्यालय का सुचारु संचालन तथा शैक्षिक उत्तरदायित्व तभी प्रभावी ढंग से निर्वहन किया जा सकता है जब विद्यालय का प्रशासनिक एवं शैक्षणिक प्रभार ज्येष्ठतम अध्यापक के पास हो।
अतः समस्त प्रधानाध्यापक / प्रभारी प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक को यह आदेश निर्गत किया जाता है कि, शासनादेशानुसार प्रत्येक विद्यालय का प्रशासनिक प्रभार केवल एवं केवल ज्येष्ठतम अध्यापक को ही सौंपा जाए। यदि वर्तमान में किसी विद्यालय में कनिष्ठ अध्यापक के पास प्रभार है, तो तत्काल प्रभाव से संशोधन कर इसे ज्येष्ठतम अध्यापक को हस्तांतरित किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि. प्रत्येक विद्यालय में शासनादेश का अक्षरशः अनुपालन हो।
निरीक्षण के दौरान यदि शासनादेश की अवहेलना पाई जाती है, तो संबंधित प्रधानाध्यापक / प्रभारी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही हेतु अनुशंसा की जाएगी।
अतः उपर्युक्त के आलोक में सभी विद्यालय अविलंब आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें।

