कलान, । बेसिक शिक्षा विभाग में कलान ब्लॉक को लेकर पहले से ही तरह-तरह की चर्चाएं होती रही हैं। शिक्षकों का आरोप रहा है कि यहां शैक्षिक कार्यों से अधिक समय कार्यालय के चक्कर लगाने में खर्च होता है। अवकाश, वेतन, उपस्थितिया अन्य प्रशासनिक मामलों के लिए कई बार शिक्षकों को बार-बार खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बुलाया जाता है।

प्राथमिक विद्यालय देवड़ा दतिया के सहायक अध्यापक डब्लू का मामला भी इसी कड़ी से जुड़कर देखा जा रहा है। अगस्त माह में मेडिकल अवकाश को लेकर शुरू हुआ विवाद बाद में एक दिन की वेतन क़टौती और उसके निस्तारण तक पहुंच गया। शिक्षक का कहना है कि पोर्टल पर मेडिकल अपलोड करने में देरी जरूर हुई, लेकिन इसकी सूचना पहले ही विभागीय स्तर पर दे दी गई थी। इसके बावजूद निरीक्षण के दौरान अनुपस्थिति दर्ज कर ली गई। सूत्रों के मुताबिक कलान ब्लॉक में इस तरह के मामलों को लेकर पहले भी शिक्षक संगठनों ने असंतोष जताया है।
शिक्षकों का कहना है कि कई बार छोटी प्रशासनिक त्रुटियों को बड़ा बनाकर मानसिक दबाव बनाया जाता है। कुछ शिक्षक इसे व्यवस्था की खामी बताते हैं तो कुछ इसे मनमानी कार्यशैली से जोड़कर देखते हैं। ब्लॉक स्तर पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण, निरीक्षण और
रिपोर्टिंग के दौरान शिक्षक पहले ही अतिरिक्त दबाव में रहते हैं। ऐसे में वेतन, उपस्थिति या अवकाश से जुड़ा विवाद उनके लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। इसी कारण कई शिक्षक खुलकर शिकायत करने से भी कतराते रहे हैं।
संगठन ने जताया विरोध
कलान के खंड शिक्षा अधिकारी को एंटी करप्शन द्वारा पकड़े जाने के बाद संगठन ने विरोध दर्ज कराया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ऋषिकांत पांडेय का कहना है कि यह कार्रवाई कुछ ऐसे शिक्षकों की साजिश का नतीजा है जो नियमित रूप से स्कूल नहीं जाते। खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा किसी भी तरह के लेन-देन से संगठन इनकार करता है। मनमानी करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
पहले भी की गई थी शिकायतें
यूटा के जिलाध्यक्ष विनीत कुमार गंगवार ने कहा कि कलान ब्लॉक में शिक्षक शोषण और भ्रष्टाचार को लेकर पूर्व में भी शिकायतें की जा चुकी हैं। यदि समय रहते उच्च अधिकारी संज्ञान लेते तो विजिलेंस ट्रैप जैसी स्थिति न बनती। यूटा शिक्षक शोषण और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार संघर्ष करता रहा है। संगठन स्पष्ट करता है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा