Home PRIMARY KA MASTER NEWS बीएलओ की मौतों पर सरकार संवेदनशील, लेकिन होगी जांच

बीएलओ की मौतों पर सरकार संवेदनशील, लेकिन होगी जांच

by Manju Maurya

राज्य ब्यूरो, लखनऊ: राज्य सरकार एसआईआर प्रक्रिया को अंजाम देने के दौरान उत्तर प्रदेश में हुई 10 बीएलओ की मौतों को लेकर संवेदनशील है। इस क्रम में मृतक बीएलओ के परिजन उन लाभों के अधिकारी भी होंगे जो सरकारी कर्मियों की नियमावली में है। परन्तु ऐसे प्रकरणों की पहले जांच भी की जाएगी। यह उत्तर मंगलवार को विधानसभा में राज्य सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने दिया। कहा कि, आयोग तो चुप है, हम अपने अन्य सरकारी कर्मियों की ही तरह प्रभावित बीएलओ परिजनों संग न्याय करेंगे।

इससे पहले कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्र मोना समेत अन्य विपक्षी सदस्यों ने विधानसभा में नियम 56 के तहत एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बीएलओ की मौतों का मुद्दा उठाते हुए सरकार और चुनाव आयोग पर आरोप लगाया। साथ ही इन सदस्यों ने यह भी मांग रखी कि मृतक बीएलओ के परिजनों को नौकरी

नियम 56 के तहत विपक्ष ने उठाया प्रकरण, सरकार और चुनाव आयोग पर लगाया आरोप

और 50 लाख रु. मुआवजा दिया जाए।

इस मुद्दे पर तर्क रखने के दौरान विपक्ष का यह भी आरोप रहा कि एसआईआर प्रक्रिया में जाति और धर्म देखकर नाम जोड़े या काटे जा रहे हैं। खासकर कांग्रेस व सपा सदस्यों ने कहा कि विपक्ष को कमजोर करने का हथियार एसआइआर है। इसके तहत गरीब, दलित व पिछड़े मतदाताओं के वोट काटे जा रहे हैं।

कांग्रेस की आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि एसआइआर के दबाव में ही बीएलओ की मौत हुई है। न तो आयोग ने और न ही सरकार ने इसका कोई संज्ञान लिया। उनका दावा रहा कि एसआइआर के बारे में बीएलओ को तकनीकी जानकारी तक नहीं दी गई। नवविवाहित महिलाओं के भी सबसे ज्यादा नाम कटे हैं। जिन बीएलओ की मौत हुई है उनके परिवार के सदस्यों को सरकार नौकरी देगी या नहीं। उन्होंने 50-50 लाख रुपये

मुआवजा देने की भी मांग की। वहीं, सपा के मनोज पारस, गौरव कुमार, धर्मराज सिंह यादव व मो. हसन रूमी ने मांग रखी कि जाति व धर्म के नाम पर वोट न काटे जाएं।

इस मामले में सरकार की ओर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि जिनकी भी मौत हुई है उनके स्वजन के प्रति हमारी संवेदनाएं हैं। मौत किस वजह से हुई यह तो जांच का विषय है। एसआइआर जब तक चल रहा है बीएलओ से लेकर सारे कर्मी चुनाव आयोग के दायरे में आते हैं। सुरेश खन्ना ने कहा कि यह मामला चुनाव आयोग के दायरे में आता है। जिला निर्वाचन अधिकारी से लेकर नीचे तक के अधिकारी चुनाव आयोग की परिधि में आते हैं।

उन्होंने विपक्ष पर तंज भी कसा कि, दर्द तो घुटने का है और इलाज दांत के डाक्टर से कराने आए हैं। हमारी पूरी संवेदना उन परिवारों के साथ है जिनके अपनों का असामयिक निधन हुआ है। जहां तक स्वजन की नौकरी का सवाल है तो सरकारी कर्मचारियों के तैयार नियमों के तहत उन्हें लाभ दिया जाएगा।

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