लखनऊ। कैबिनेट से शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के निर्णय से खुशी की लहर है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने सरकार का आभार जताते हुए शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने व सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा में शामिल करने की मांग की है।
उप्र. प्राथमिक शिक्षक संघ के
उच्च शिक्षा के शिक्षक व कर्मचारी मायूस
उच्च शिक्षा के शिक्षकों व कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा न मिलने से मायूसी है। उप्र शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मौलेंदु मिश्रा और लविवि सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुटाक्टा) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय व महामंत्री डॉ. अंशु केडिया ने उच्च शिक्षा के शिक्षकों व कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल करने की मांग की है। उप्र कांग्रेस कमेटी शिक्षक प्रकोष्ठ के चेयरमैन डॉ. अमित कुमार राय ने सरकार पर उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने सरकार से शिक्षकों को ईएल-सीएल सुविधा आदि पर भी जल्द निर्णय
लेने की मांग की है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने कैशलेस
चिकित्सा सुविधा के दायरे में शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइया को भी रखना महत्वपूर्ण निर्णय है।
उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला व महामंत्री सुशील कुमार यादव ने कहा कि 1.43 लाख शिक्षामित्रों व 25000 रसोइयों को भी मुफ्त इलाज की सुविधा देना बहुत बड़ा निर्णय है। शिक्षामित्र संघ के प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह ने मानदेय वृद्धि पर भी जल्द सकारात्मक निर्णय की मांग की।