*उत्तर प्रदेश में वर्षों से काम कर रहे करीब 25 हजार अंशकालिक शिक्षकों (अनुदेशकों) की नौकरी खत्म नहीं होगी। इनके 17 हजार रुपए के मानदेय का रास्ता भी साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की वह अपील खारिज कर दी है, जिसमें यूपी सरकार अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने के खिलाफ थी। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने साफ कहा है कि निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद भी अनुदेशकों की नियुक्ति केवल संविदात्मक नहीं मानी जा सकती।
जीत गए अनुदेशक, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला! यूपी सरकार को तगड़ा झटका
🔹 नौकरी सुरक्षित : उत्तर प्रदेश के सरकारी जूनियर स्कूलों में कार्यरत अनुदेशकों की नौकरी खत्म नहीं होगी।
🔹 ₹17,000 मानदेय मंजूर : सुप्रीम कोर्ट ने अनुदेशकों को ₹17,000 प्रतिमाह मानदेय देने के आदेश को सही ठहराया।
🔹 सरकार की अपील खारिज : मानदेय बढ़ाने के खिलाफ यूपी सरकार की अपील सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी।
🔹 फुल टाइम माना कोर्ट ने 10 वर्षों से लगातार काम करने के कारण अनुदेशक “डीम्ड परमानेंट/फुल टाइम” माने गए।
🔹 कॉन्ट्रैक्ट खत्म = नौकरी खत्म नहीं : संविदा अवधि पूरी होने के बाद भी अनुदेशकों की सेवा स्वतः समाप्त नहीं होती—कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी।
🔹 पद ऑटोमेटिक सृजित लगातार सेवा के कारण पद स्वतः सृजित माना गया।
🔹 अनुचित श्रम व्यवहार पर सख्ती : 2013 से ₹7,000 मानदेय को कोर्ट ने “अनुचित श्रम व्यवहार” कहा।
🔹 आर्टिकल 23 का हवाला : ₹17,000 से कम मानदेय संविधान के अनुच्छेद 23 के विपरीत—सुप्रीम कोर्ट।
🔹 मानदेय पुनरीक्षण का अधिकार : अंशकालिक शिक्षकों को नियत अवधि पर मानदेय पुनरीक्षण का पूरा अधिकार।
🔹 2017–18 से ₹17,000 प्रभावी : अगले संशोधन तक ₹17,000 प्रतिमाह मान्य। 2017 से अब तक का मिलेगा एरियर
🔹 भुगतान की समय-सीमा तय : 1 अप्रैल 2026 से नियमित भुगतान शुरू
🔹4 फरवरी 2026 से 6 महीने में पूरा बकाया भुगतान अनिवार्य
🔹 कोर्ट का सवाल सरकार से
“जब पढ़ेगा इंडिया, तभी बढ़ेगा इंडिया—मानदेय देने में दिक्कत क्या है?”
अनुदेशकों के संघर्ष की जीत : यह फैसला शिक्षा, सम्मान और अधिकार तीनों की जीत है।
अंशकालिक शिक्षकों की नियुक्ति, अवधि समाप्त होने के बाद संविदात्मक नहीं रह जाती।
उन्हें कहीं और नौकरी करने से रोक दिया गया है।
ऐसे पद स्वतः सृजित हो जाते हैं।
मानदेय में संशोधन अनुचित व्यवहार के समान है (7,000)।
उपरोक्त के मद्देनजर,
उत्तर प्रदेश में अंशकालिक शिक्षक 2013 में निर्धारित अपने मानदेय में संशोधन के हकदार हैं।
यह संशोधन वार्षिक रूप से नहीं तो आवधिक रूप से होना चाहिए।
17-18 से संशोधन होने तक 17,000 रुपये प्रति माह का भुगतान किया जाएगा।
भुगतान 1.04.2026 से शुरू होगा।
बकाया राशि का भुगतान आज से 6 महीने के भीतर किया जाएगा।