कोर्ट के आदेश के बाद योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने यूपी पंचायत चुनाव को पूरी तैयारी बताई है। राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव जुलाई तक पूरे हो जाएंगे।
UP Panchayat Elections 2026: यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव जुलाई तक पूरे हो जाएंगे। ग्राम प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष इत्यादि का जुलाई तक पूरा किया जाएगा। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद बुधवार को कहा कि चुनाव कराने के लिए विभाग तैयारी कर रहा है। पूरी कोशिश होगी कि जुलाई तक चुनाव हो जाए।
पंचायती राज विभाग की ओर से अभी तक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं किया गया है। ऐसे में पंचायती राज मंत्री के बयान के बाद अब इसके गठन में तेजी आएगी।

ओबीसी आरक्षण को तय करने के लिए आयोग का गठन किया जाना आवश्यक है। ऐसे में गठन के बाद विभिन्न पदों पर आरक्षण जारी किया जाएगा और फिर उसके बाद चुनाव होगा। निर्वाचित ग्राम प्रधानों की प्रथम बैठक 27 मई 2021 को हुई थी। ऐसे में प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को पूरा हो जाएगा। ऐसे ही ब्लॉक प्रमुखों की प्रथम बैठक 20 जुलाई 2021 को हुई थी। ऐसे में इनका कार्यकाल 19 जुलाई 2026 व जिला पंचायत अध्यक्षों की पहली बैठक 12 जुलाई 2021 को हुई थी। ऐसे में इनका कार्यकाल 11 जुलाई 2026 को खत्म हो रहा है। कार्यकाल खत्म होने के छह महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं
अब जल्द आयोग के गठन की उम्मीद
फिलहाल अब पंचायती राज विभाग पिछड़ा वर्ग से संबंधित मामलों का ज्ञान रखने वाले पांच व्यक्तियों को आयोग का सदस्य बनाएगी। पांच सदस्यों में से ही एक अध्यक्ष होगा जो कि उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे। आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों का कार्यकाल छह महीने का होता है। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पर ही ओबीसी आरक्षण तय कर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। फिलहाल अब जल्द आयोग के गठन की उम्मीद जताई है। अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज होंगी।
कब किसका कार्यकाल हो रहा पूरा
पद कार्यकाल खत्म
ग्राम प्रधान 26 मई 2026
ब्लॉक प्रमुख 19 जुलाई 2026
जिला पंचायत अध्यक्ष 11 जुलाई 2026
कोर्ट ने क्या कहा था
आपको बता दें कि यूपी पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को कड़ा निर्देश देते हुए पूछा है कि क्या पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले निर्वाचन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि संवैधानिक मर्यादाओं के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल किसी भी स्थिति में पांच वर्ष की अवधि से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।