प्रयागराज,
हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें हर समय शरीर में रक्तस्राव का खतरा बना रहता है। इस वर्ष पांच छात्रों ने हीमोफीलिया से जंग लड़ते हुए यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की बोर्ड की परीक्षा पास की है। इसमें तीन छात्र 12वीं और दो 10वीं के परीक्षा में शामिल हुए।
इन छात्रों का उपचार हीमोफीलिया सोसाइटी के सहयोग से एसआरएन अस्पताल में चल रहा है। हीमोफीलिया सोसाइटी के अध्यक्ष विवेक सिंह ने बताया कि पीड़ित छात्र संबंधित फैक्टर का इंजेक्शन लगवाकर परीक्षा देने जाते थे क्योंकि तीन घंटे तक बैठकर लिखना उनके लिए कठिन था। हीमोफीलिया से जूझते हुए जिन छात्रों ने सफलता प्राप्त की है उनमें महर्षि विद्या मंदिर नैनी के भूपेंद्र सिंह भी हैं। भूपेंद्र को हाईस्कूल में 94.5 फीसदी अंक मिले हैं। वहीं अंशुमान सिंह ने इंटरमीडिएट में 91
हीमोफीलिया से पीड़ित
छात्रों ने पास की 10वीं
और 12वीं की परीक्षा
फैक्टर इंजेक्शन लगवा कर असहनीय दर्द के बीच दी थी परीक्षा
फीसदी अंक प्राप्त कर नाम रोशन किया। इस क्रम में शैलेन्द्र सिंह ने हाईस्कूल के 82.2 फीसदी अंक प्राप्त किया। शैलेंद्र पांडेय ने इंटरमीडिएट में 52.8 फीसदी अंक प्राप्त किया। वहीं आलोक सिंह को इंटर में 57.8 अंक हासिल किए हैं। शैलेंद्र ने बताया कि परीक्षा के समय उंगलियां लाल हो जाती थीं। घर से परीक्षा केंद्र तक आने-जाने में भय रहता था एक छोटी सी चोट या खरोंच घातक हो सकती है। बता दें, हीमोफीलिया आनुवंशिक विकार है जिसमें रक्त जमता नहीं है और मामूली चोटों से भी अत्यधिक रक्तस्त्राव होता है।