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दो मकानों से किराया मिलने पर आईटीआर-1 भरें

by Manju Maurya

आयकर विभाग ने आकलन वर्ष 2026-27 के लिए सभी आयकर रिटर्न (आईटीआर) फॉर्म जारी कर दिए हैं। इसी के साथ करदाताओं के लिए आईटीआर भरने की प्रक्रिया समय से शुरू हो गई है। इससे करदाताओं को जरूरी दस्तावेज जुटाने का पर्याप्त वक्त मिलेगा, जिससे वे समय से अपना रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। खास बात यह है कि इस बार विभाग ने करदाताओं को राहत देते हुए आईटीआर-1 और आईटीआर-4 में अहम बदलाव किए हैं। अब दो घरों से होने वाली आय आईटीआर-1 में भी दिखाई जा सकती है। इससे जिन लोगों के दो घर हैं, उन्हें अब आईटीआर-2 या 3 भरने की जरूरत नहीं होगी।

सभी के लिए आईटीआर भरना जरूरी

यह फॉर्म उन करदाताओं के लिए है, जिनकी वार्षिक आय ₹50 लाख से कम है। इसके साथ ही अब इस फॉर्म में दो घरों से होने वाली आय भी दिखाई जा सकती है। पहले केवल एक ही हाउस प्रॉपर्टी की आय दिखाने की अनुमति थी।

आय के स्रोत : वेतन, दो मकान संपत्ति से आय, पारिवारिक पेंशन, कृषि आय, दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ, अन्य स्रोतों से आय (जैसे बचत खाते का ब्याज, जमा राशि पर ब्याज, आयकर रिफंड का ब्याज)।

कब न करें इस्तेमाल

●अगर आय ₹50 लाख से ज्यादा है

●किसी कंपनी के निदेशक हैं या एनआरआई हैं

पुराने नियमों में किसी करदाता के पास दो घर हैं और दोनों से किराया आ रहा है, तो वह आईटीआर-1 नहीं भर सकते थे। उन्हें आईटीआर-2 का इस्तेमाल करना होता था। लेकिन अब सरकार ने ऐसे करदाताओं को राहत देते हुए उन्हें आईटीआर-1 के दायरे में शामिल कर लिया है।

हालांकि, करदाता की कुल सालाना कमाई 50 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही ऐसे करदाताओं को सावधानी भी बरतनी होगी। उनकी किराये हुई आय, नगर निगम को दिया कर और कर कटौती का पूरा विवरण वार्षिक कर सूचना (एआईएस) से हूबहू मिलना चाहिए। यदि एआईएस में दर्ज जानकारी और आईटीआर में विसंगति पाई गई, तो विभाग का एआई सिस्टम तुरंत नोटिस जारी कर देगा।

म्यूचुअल फंड का मुनाफा दिखा सकेंगे : अब तक का नियम यह था कि अगर कमाई वेतन के अलावा शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड के मुनाफे (पूंजीगत लाभ) से होती थी, तो करदाता को अनिवार्य रूप से आईटीआर-2 फॉर्म भरना पड़ता था। लेकिन इस साल से करदाता सूचीबद्ध शेयर और म्यूचुअल फंड से होने वाले लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ को भी आईटीआर-1 में दिखा सकते हैं। इसमें एक बड़ी शर्त है यह मुनाफा 1.25 लाख रुपये तक ही होना चाहिए। यदि मुनाफा इस सीमा से एक रुपया भी ज्यादा हुआ तो आईटीआर-2 भरना होगा।

पूंजीगत लाभ की कर दरों में बदलाव : बजट 2024-25 में टैक्स की दरों को लेकर जो घोषणाएं की गई थीं, वह अब इस साल के रिटर्न में पूरी तरह लागू होंगी। पहले लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) पर अलग-अलग कर दर (10% और 12.5%) लागू होती थी। अब सभी निवेश संपत्तियों पर एलटीसीजी की दर 12.5% तय कर दी है।

इसमें इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलेगा। वहीं, कुछ मामलों में जहां इंडेक्सेशन लागू होता है, वहां दर 20% रहेगी। इस साल इन्हीं दरों के अनुसार रिटर्न भरना होगा।

इसका ध्यान रखें : वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर आकलन पुराने ‘आयकर अधिनियम-1961‘ के तहत ही होगा, नए कानून के तहत नहीं। इसलिए करदाता को कर वर्ष की जगह आकलन वर्ष जैसे पुराने शब्द ही दिखेंगे। कर वर्ष व्यवस्था के तहत आईटीआर अगले साल से भरे जाएंगे।

30 दिन के भीतर करें सत्यापन : रिटर्न दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर रिटर्न को सत्यापित करना जरूरी है। इसे आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग के जरिए ऑनलाइन किया जा सकता है। सत्यापित न करने पर आयकर विभाग रिटर्न को प्रोसेस नहीं करेगा।

ये फॉर्म उन लोगों के लिए है, जिनकी सालाना आय 50 लाख रुपये से ज्यादा है। यह आय वेतन, पेंशन, पूंजीगत लाभ जैसे स्रोतों से होनी चाहिए।

आय के स्रोत : वेतन, पेंशन, पूंजीगत लाभ जैसे स्रोत। किसी निवेश, या प्रॉपर्टी बेचने पर छोटी अथवा लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ या हानि हो, लॉटरी या घुड़सवारी दौड़ जीतने से आय, विदेश से आमदनी या विदेश में संपत्ति हो।

कब न करें इस्तेमाल: अगर आपकी आय में व्यवसाय या पेशे से लाभ या साझेदारी फर्म से वेतन, बोनस या कमीशन शामिल हो।

इस फॉर्म को व्यक्तिगत करदाता, एचयूएफ या कंपनी नहीं भर सकतीं। यह कुछ संस्थाओं के लिए होता है। यह फर्मों, एलएलपी (सीमित देयता भागीदारी), एओपी (व्यक्तियों का संघ), बीओआई (व्यक्तियों का निकाय), स्थानीय प्राधिकरण और सोसायटी, व्यवसायिक ट्रस्ट जैसे- निजी ट्रस्ट, पीएफ ट्रस्ट, ग्रेच्युटी ट्रस्ट और निवेश निधि के लिए है।

यह फॉर्म छोटे-मोटे कारोबार या प्रोफेशन से कमाई करने वाले लोगों के लिए है। कुल सालाना आय 50 लाख रुपये तक होनी चाहिए।

आय के स्रोत : छोटे व्यवसाय या पेशे से आय, वेतन, एक मकान संपत्ति, ब्याज आय, 1.25 लाख रुपये तक का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ

उपयोग : यह फॉर्म उन मामलों में लागू होता है, जब आय का निर्धारण अनुमानित आधार (प्रीजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम) पर किया जाता है यानी जो करदाता धारा 44एडी, 44एडीए या 44एई चुनते हैं, वो यह फॉर्म भर सकते हैं।

कब न करें इस्तेमाल : अगर आप एनआरआई हैं। आय ₹50 लाख से अधिक है। ₹1.25 लाख से अधिक का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ है। कृषि आय ₹5,000 से अधिक है। एक से अधिक मकान संपत्ति से आय है। कंपनी के निदेशक हैं। ऐसी स्थिति में आईटीआर-4 का इस्तेमाल न करें।

आयकर नियमों के मुताबिक, उन सभी लोगों को आईटीआर जमा करना जरूरी है, जिनकी सकल आय मूल कर छूट की सीमा से अधिक है। कई लोगों को गलतफहमी रहती है कि यदि उनकी सालाना आय पुरानी कर व्यवस्था में पांच लाख रुपये और नई कर व्यवस्था में 12 लाख रुपये से कम है तो आयकर रिटर्न भरना जरूरी नहीं है लेकिन ऐसा नहीं है। कर विशेषज्ञों के अनुसार, इस सीमा से कम आय होने पर टैक्स इसलिए नहीं देना पड़ता क्योंकि धारा 87ए के तहत पुरानी कर व्यवस्था में 12,500 रुपये और नई कर व्यवस्था में 60 हजार रुपये तक की रिबेट मिलती है। लेकिन पुरानी कर व्यवस्था में छूट की वास्तविक सीमा अब सिर्फ 2.5 लाख रुपये है। वहीं, नई कर व्यवस्था में यह सीमा चार लाख रुपये है। यदि इससे एक रुपये भी अधिक आय है तो करदाता के लिए आईटीआर दाखिल करना जरूरी है, भले ही उनका टैक्स शून्य हो। इसे जीरो आईटीआर भी कहते हैं।

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