यूपी में स्कूल समय बदलने की मांग तेज, 5 घंटे संचालन का प्रस्ताव; नए सत्र का उत्साहपूर्ण आगाज़
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों के संचालन समय को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्कूलों का समय घटाकर 5 घंटे करने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी और महामंत्री उमाशंकर सिंह ने कहा है कि वर्तमान में लागू बढ़ा हुआ समय अब नियमों के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि कोरोना काल में पढ़ाई की भरपाई के उद्देश्य से “टाइम एंड मोशन” के तहत विद्यालयों का समय बढ़ाया गया था, जो अब तक जारी है। जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार विद्यालयों के संचालन की अधिकतम अवधि 5 घंटे निर्धारित है। ऐसे में पूर्व की तरह सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक स्कूल चलाने की मांग की गई है।
इसी बीच, प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत उत्साह और उमंग के साथ हुई। पहले दिन विद्यालयों में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया और स्कूलों को फूलों व गुब्बारों से सजाया गया। कई स्थानों पर रैलियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
नए सत्र के साथ ही राज्य सरकार ने “स्कूल चलो अभियान” की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना और पढ़ाई बीच में छोड़ चुके बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ना है। अभियान का पहला चरण 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 1 जुलाई से 15 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उसका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। वहीं, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए प्रत्येक जिले, ब्लॉक और विद्यालय को अलग-अलग स्तर पर बजट उपलब्ध कराया गया है।
अभियान के तहत रैलियां, जागरूकता कार्यक्रम और एलईडी वैन के माध्यम से गांव-गांव तक शिक्षा का संदेश पहुंचाया जा रहा है। साथ ही छात्रों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें भी वितरित की जा रही हैं।
प्रदेश में एक ओर जहां नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत उत्साह के साथ हुई है, वहीं स्कूलों के समय में बदलाव की मांग ने शिक्षा व्यवस्था में नई चर्चा छेड़ दी है। अब सरकार के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं।