महोबा जनपद महोबा के बेसिक शिक्षा विभाग में उस समय हड़कंप मच गया जब एक महिला प्रधानाध्यापिका ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) पर यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न, अश्लील टिप्पणियां और साजिशन निलंबन कराने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र सौंप दिया। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक भारी हलचल मची हुई है। पीड़ित शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि जब उसने BSA की “गलत मांगों” को ठुकरा दिया तो उसके खिलाफ झूठी जांचें बैठा दी गईं और अंततः उसे निलंबित कर दिया गया।
पीड़िता श्रीमती स्नेहलता शुक्ला, जो प्राथमिक विद्यालय तिन्दौली ब्लॉक कबरई में प्रधानाध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं, ने अपने शिकायती पत्र में बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वह वर्ष 2018 से विद्यालय में तैनात हैं और उन्हें उत्कृष्ट शिक्षण कार्य के लिए राज्य सरकार द्वारा “राज्य अध्यापक पुरस्कार” से भी सम्मानित किया जा चुका है। बावजूद इसके विभागीय अधिकारी लगातार उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहे।
शाम को मेरे आवास पर आना…”
पीड़िता के अनुसार, जनवरी 2025 में वह विद्यालय की बाउंड्रीवाल संबंधी समस्या बताने BSA कार्यालय पहुंची थीं। उसी दौरान BSA कार्यालय से बाहर निकल रहे थे। शिक्षिका का आरोप है कि अधिकारी ने उन्हें घूरते हुए कहा — “शाम को मेरे आवास पर आना।” शिक्षिका का कहना है कि वह अधिकारी की मंशा समझ गईं और उनके आवास पर नहीं गईं।
इसके बाद विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका नम्रता कौशिक और सहायक अध्यापक पुरुषोत्तम ने कथित रूप से उन पर दबाव बनाना शुरू किया। शिक्षिका ने आरोप लगाया कि दोनों ने कहा — “साहब को अंग्रेजी गुलाब बहुत पसंद है, हमारे साथ चलो, साहब खुश हो जाएंगे।” शिक्षिका का दावा है कि उन्होंने इस प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया।
तुम बहुत सती-सावित्री बनती हो…”
शिकायत के अनुसार, जब शिक्षिका ने BSA की कथित मांगें नहीं मानीं तो उनके खिलाफ झूठी जांचों का सिलसिला शुरू हो गया। कई प्रकार की विभागीय जांचें भेजी जाने लगीं जिससे वह मानसिक तनाव में आ गईं। इसके बाद वह अपने 73 वर्षीय वृद्ध पिता हरगोविंद तिवारी को लेकर BSA कार्यालय पहुंचीं।
यहीं पर मामला और गंभीर हो गया। शिक्षिका का आरोप है कि BSA ने उनके पिता को कार्यालय से अपमानित कर बाहर निकाल दिया। इसके बाद अधिकारी ने उनसे कथित तौर पर कहा — “तुम बहुत सती-सावित्री बनती हो, मेरी बात मान जाओ, मैं तुम्हारा प्रमोशन करवा दूंगा, एक रात की ही तो बात है।”
पीड़िता ने आरोप लगाया कि अधिकारी ने अश्लील बातें कीं, गलत नजर से देखा और उन्हें पकड़ने की कोशिश भी की। शिक्षिका के मुताबिक उन्होंने बार-बार विरोध किया और साफ कहा कि वह किसी भी गलत कार्य के लिए तैयार नहीं हैं। इसके बाद उन्हें गालियां देकर कार्यालय से भगा दिया गया।
साहब की बात मान लो, सब ठीक हो जाएगा”
शिक्षिका का कहना है कि अगले दिन जब वह विद्यालय पहुंचीं तो वहां मौजूद सहायक अध्यापक और सहायक अध्यापिका ने फिर उन्हें समझाने का प्रयास किया। आरोप है कि दोनों ने कहा — “साहब की बात मान लो, सब ठीक हो जाएगा।”
इतना ही नहीं, पीड़िता ने दावा किया कि बाद में विभागीय कर्मचारियों द्वारा उनके निजी मोबाइल नंबर पर लगातार फोन किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यालय में तैनात कर्मचारियों ने भी BSA के दबाव में आकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया। शिक्षिका का कहना है कि विद्यालय का पूरा स्टाफ उनकी गतिविधियों की जानकारी BSA को देता था और उनके “काले कारनामों” में शामिल था।
शारीरिक शोषण नहीं किया, इसलिए निलंबित कर दिया”
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब 28 जनवरी 2026 को शिक्षिका के खिलाफ निलंबन आदेश जारी कर दिया गया। पीड़िता का आरोप है कि यह कार्रवाई बिना किसी ठोस साक्ष्य के की गई और पूरी तरह बदले की भावना से प्रेरित थी।
उन्होंने कहा कि 17 वर्षों की सेवा में कभी कोई गंभीर शिकायत नहीं रही। राज्य स्तर पर सम्मानित शिक्षिका होने के बावजूद उन्हें अपमानित किया गया। पीड़िता ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि यदि वह अधिकारी की “शारीरिक शोषण” संबंधी मांग मान लेतीं तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।
पुलिस अधीक्षक से FIR की मांग
पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में BSA राहुल मिश्रा, सहायक अध्यापक पुरुषोत्तम और सहायक अध्यापिका नम्रता कौशिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
इस मामले के सामने आने के बाद जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला संगठनों और शिक्षक संगठनों में भी इस प्रकरण को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह सिर्फ एक महिला शिक्षिका का मामला नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर बड़ा सवाल है।
विभाग में मचा हड़कंप, अधिकारी चुप
मामला मीडिया और प्रशासन तक पहुंचने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में अफरा-तफरी का माहौल है। हालांकि खबर लिखे जाने तक आरोपित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। सूत्रों के अनुसार उच्च अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है और गोपनीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।
महिला सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि एक राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है तो सामान्य महिला कर्मचारियों की स्थिति क्या होगी।
अब सबकी नजर पुलिस प्रशासन पर टिकी है कि इतने गंभीर आरोपों के बाद क्या कार्रवाई होती है। यदि शिकायतों में सच्चाई पाई जाती है तो यह मामला प्रदेश के शिक्षा विभाग का सबसे बड़ा यौन शोषण और सत्ता के दुरुपयोग का मामला साबित हो सकता है।