सीआरपीएफ के एक सेवानिवृत्त कर्मी की याचिका को खारिज करते हुए की टिप्पणी
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में स्पष्ट किया कि पेंशन का निर्धारण कर्मचारी के पदनाम के आधार पर नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति के समय प्राप्त वास्तविक वेतनमान के आधार किया जाएगा। पर
अदालत ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक सेवानिवृत्त कर्मी की याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। मामला 2018 में केंद्रीय सिविल पेंशन संशोधन प्राधिकरण के उस आदेश से जुड़ा था, जिसमें उच्च
वेतन बैंड के आधार पर पेंशन संशोधित करने की मांग ठुकरा दी गई थी। याचिकाकर्ता, जो सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर/रेडियो ऑपरेटर के पद से 1997 में सेवानिवृत्त हुए थे, ने तर्क दिया कि उनके पद के अनुरूप उच्च वेतनमान के आधार पर पेंशन तय होनी चाहिए। हालांकि, केंद्र सरकार और सीआरपीएफ ने अदालत में कहा कि पेंशन हमेशा
रिटायरमेंट के समय लागू वास्तविक वेतनमान के आधार पर तय होती है, न कि केवल पदनाम के आधार पर। अदालत ने रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद पाया कि याचिकाकर्ता को सेवा के दौरान उस उच्च वेतनमान में कभी औपचारिक रूप से नहीं रखा गया था, जिसका वह दावा कर रहे थे। पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि सेवा कानून में पदनाम और वेतनमान अलग-अलग अवधारणाएं हैं, और वित्तीय लाभ वेतनमान से जुड़े होते हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा पहचान पत्र केवल पद को प्रमाणित करता है, न कि वेतनमान के अधिकार को।