कानपुरः सरकार मदरसा शिक्षा को बेहतर बनाने तथा मदरसा छात्रों को मुख्यधारा में लाने के प्रयास कर रही है। इसके लिए मदरसों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया गया है। मदरसा शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए छह सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया है। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा संचालित मदरसों में शिक्षकों की योग्यता का निर्धारण करने की तैयारी की जा रही है। एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम को पढाने के लिए उनको प्रशिक्षित करने की भी कवायद चल रही है।

सरकार मदरसों में पढ़ रहे छात्रों के भविष्य को बेहतर करने के सात मदरसा शिक्षा को रोजगारपरक बनाने की तैयारी कर रही है। मदरसों को व्यवसायिक शिक्षा से जोड़ने की योजना है। इसको लेकर हाल ही में
शासन ने मदरसा शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए छह सदस्यीय कमेटी गठित की
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में मदरसा संगठन के पदाधिकारियों की बैठक भी हुई है। मदरसा संगठनों से मदरसों की बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी दिए है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया जा चुका है। इसमें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अलावा माध्यमिक शिक्षा, बेसिक शिक्षा, न्याय व वित्त विभाग के विशेष सचिव सदस्य बनाए गए हैं यह समिति मदरसा शिक्षकों की विषयवार योग्यता का निर्धारण
मदरसों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम भी लागू, शिक्षकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
कर उनको प्रशिक्षित करने की नियमावली भी तय करेगी। मदरसा शिक्षकों को ब्रिज कोर्स के माध्यम से आधुनिक विषयों से जोड़ा जाएगा। नए शिक्षकों की चयन प्रक्रिया को लेकर भी नीति निर्धारित की जाएगी। प्रदेश सरकार मदरसों का सर्वे भी करा चुकी है। कक्षा एक से तीन तक एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम भी इस सत्र से शुरू कर दिया गया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पवन कुमार सिंह बताते हैं कि मदरसा शिक्षा को बेहतर बनाने तथा मदरसा शिक्षकों को लेकर शासन स्तर पर जो भी निर्देश आएंगे उसका पालन कराया जाएगा।