Home News एआई सर्वर ठंडा करने के लिए अरबों गैलन पानी का इस्तेमाल

एआई सर्वर ठंडा करने के लिए अरबों गैलन पानी का इस्तेमाल

by Manju Maurya

डाटा सेंटर एआई सर्वरों को ठंडा रखने के लिए अरबों गैलन पानी की खपत कर रहे है। दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल गूगल के डाटा सेंटर ने करीब 6.1 अरब गैलन मीठे पानी का इस्तेमाल किया। गूगल ने अपनी 2024 पर्यावरण रिपोर्ट जारी की है। इसमें पहली बार साफ तौर पर बताया गया है कि एआई और डाटा सेंटर तेजी से बिजली और पानी की मांग बढ़ा रहे हैं। 2030 तक 14 गुना तक बिजली की मांग बढ़ सकती है।

गूगल की रिपोर्ट के अनुसार, गूगल डाटा सेंटरों ने 6.1 अरब गैलन पानी उपयोग किया जो पिछले वर्ष से 17% अधिक है। इतना पानी अमेरिका के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में लगभग 41 गोल्फ कोर्स को एक साल तक सींचने के बराबर है। वहीं, काउंसिल ऑन एनर्जी और एनवायरमेंट एंड वाटर ने भी इसको लेकर अनुमान जताया है। काउंसिल ऑन एनर्जी और एनवायरमेंट एंड वाटर के सीईओ डॉ. अरुणाभ घोष ने कहा कि जैसे घरेलू उपकरणों के लिए स्टार रेटिंग होती है, वैसे ही डाटा सेंटर्स और जीपीयू के लिए भी ऊर्जा और जल दक्षता रेटिंग होनी चाहिए। इससे कंपनियों में नवाचार की होड़ लगेगी।

पर्यावरण पर असर : वैज्ञानिकों को चिंता है कि एआई के बढ़ने के साथ पानी की खपत तेजी से बढ़ेगी। 2028 तक एआई डाटा सेंटर का पानी उपयोग 11 गुना तक बढ़ सकता है। समस्या इसलिए गंभीर है क्योंकि कई डाटा सेंटर ऐसे इलाकों में बन रहे हैं जहां पहले से पानी की कमी है। वहीं, गूगल सर्च, यूट्यूब, जीमेल और क्लाउड सेवाएं विशाल डाटा सेंटर पर निर्भर हैं, जहां हजारों सर्वर लगातार चलते रहते हैं। इसी कारण 2019 के बाद कंपनी का कुल कार्बन उत्सर्जन 50% से अधिक बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां गंदा या रिसाइकिल पानी इस्तेमाल नहीं करतीं। इसका कारण रसायन विज्ञान है। पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज होते हैं। पानीगर्म होकर उड़ता है, तो ये खनिज जमा होकर एक सख्त परत बना देते हैं, जिसे लाइमस्केल कहते हैं। यह परत पाइप जाम कर देती है, पंप खराब करती है, मशीनों को नुकसान पहुंचाती है।

देश में पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए गूगल मैप्स में नया फीचर

गूगल ने 2021 में मैप्स में एक फीचर शुरू किया। इसका नाम फ्यूल ईफिसिएंट रूटिंग है। यानि अब गूगल मैप्स सिर्फ सबसे छोटा रास्ता नहीं, बल्कि कम पेट्रोल खर्च करने वाला रास्ता भी दिखाता है। 2023 तक 2.9 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीनहाउस गैस कम निकली। 2023 में गूगल ने यह फीचर भारत और इंडोनेशिया में भी शुरू कर दिया। भारत में दोपहिया के लिए भी फ्यूल-सेविंग रूट दिखाए जा रहे हैं।

भारत में डाटा सेंटर्स की बिजली मांग जो लगभग 0.5 गीगावाट है। ये 2030 तक बढ़कर 6.5 से सात गीगावाट होने का अनुमान है। 2024 में सर्वर को ठंडा रखने के लिए भारत के डाटा सेंटर्स ने अनुमानित 150 अरब लीटर पानी का उपयोग किया। वहीं, गूगल औसतन 64% साफ ऊर्जा पर चल रहा। 44 क्षेत्रों में से 10 जगह 90% से ज्यादा हरित बिजली है। अब उत्तर भारत में 29% और पश्चिम भारत 14% गूगल के डाटा सेंटर अभी ज्यादातर कोयले की बिजली पर चल रहे हैं।

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