📰 भारत में बुजुर्गों की तुलना में तीन गुना तनाव में हैं युवा, रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
नई दिल्ली। भारत में युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य तेजी से चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक हालिया वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार देश के युवा बुजुर्गों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक तनाव का सामना कर रहे हैं। अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की मानसिक स्थिति अपेक्षाकृत अधिक प्रभावित है।
रिपोर्ट में मानसिक स्वास्थ्य का आकलन ‘मेंटल हेल्थ क्वोशिएंट (MHQ)’ के आधार पर किया गया, जिसमें भारत का औसत स्कोर 33 दर्ज किया गया। यह स्कोर वैश्विक औसत से काफी कम है। तुलना करें तो डोमिनिकन रिपब्लिक 91 अंकों के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि तंजानिया 88 अंकों के साथ बेहतर स्थिति में है। भारत की रैंकिंग सूची में निचले पायदानों में शामिल रही।
📊 युवाओं की स्थिति चिंताजनक
18-34 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य स्कोर 63% तक प्रभावी नहीं पाया गया। इसके विपरीत 55 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों का औसत स्कोर 96 रहा, जो दर्शाता है कि बुजुर्ग मानसिक रूप से अधिक संतुलित हैं।
📱 बढ़ता स्मार्टफोन उपयोग बना बड़ा कारण
रिपोर्ट के अनुसार भारत में पहली बार स्मार्टफोन उपयोग की औसत आयु 16.5 वर्ष है। कम उम्र में डिजिटल दुनिया से जुड़ाव युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहा है। अधिक स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया दबाव और तुलना की प्रवृत्ति तनाव को बढ़ा रही है।
🍔 जंक फूड और अस्वस्थ जीवनशैली
करीब 44% युवा नियमित रूप से जंक फूड का सेवन करते हैं, जबकि लगभग 11% युवा पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर निर्भर हैं। पोषण की कमी और असंतुलित आहार भी मानसिक अस्थिरता को बढ़ावा दे रहे हैं।
👥 सामाजिक अलगाव भी बड़ी वजह
इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक समय बिताने से आमने-सामने संवाद में कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार 64% युवाओं को परिवार से पर्याप्त भावनात्मक सहयोग नहीं मिल पाता, जबकि बुजुर्गों में यह आंकड़ा 78% तक है। सामाजिक अलगाव, प्रतिस्पर्धा और करियर दबाव युवाओं को मानसिक रूप से कमजोर बना रहे हैं।