नई दिल्ली। 13वां संविधान संशोधन विधेयक के रूप में प्रस्तुत महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पारित नहीं हो सका। विपक्ष के तीव्र विरोध और पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण सरकार दो-तिहाई बहुमत जुटाने में असफल रही, जिससे यह विधेयक सदन में गिर गया।
विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। मतदान के दौरान पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 मत पड़े, जो आवश्यक संख्या से कम रहे।
संसद में जोरदार हंगामा
बिल पर चर्चा के दौरान सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दलों ने बिल के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई और संशोधन की मांग की। उनके विरोध के चलते सदन में कई बार कार्यवाही बाधित हुई।
‘विपक्ष महिलाओं के हित में नहीं’ : अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष का रुख महिलाओं के हित में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल राजनीतिक कारणों से इस महत्वपूर्ण विधेयक का विरोध कर रहे हैं।
‘संविधान बचाने की लड़ाई’ : राहुल गांधी
वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि सरकार विधेयक को सही तरीके से प्रस्तुत करने में विफल रही है।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी बिल पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कई खामियां हैं, जिन्हें दूर किए बिना इसे पारित करना उचित नहीं होगा।
इस घटनाक्रम के बाद महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापक सहमति के बिना ऐसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन को पारित कराना कठिन होता है।