मौसम विभाग को जल्द ही लिडार तकनीक मिलने वाली है, जिसके जरिये वह अपने पूर्वानुमानों को सटीक बना पाएगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने इसे विकसित किया है, जिसे मेघसूचक नाम दिया गया है।

- वित्तीय वर्ष 2026-27 में बेसिक शिक्षा निदेशालय द्वारा नियुक्त शिक्षा मित्रों के मानदेय भुगतान के लिए धन आवंटित किया गया
- इस राज्य में में भी जनगणना कार्य में मार्क ऑन ड्यूटी, देखें आदेश
- 18 महीने का कोरोना काल का बकाया एरियर जल्द देंगे-वित्त मंत्री
- इलाहाबाद हाई कोर्ट की डबल बेंच ने समायोजन 3 को त्रुटिपूर्ण मानते हुए फिर से समायोजन करने का ऑर्डर दिया। 30 अप्रैल 2026 की छात्र संख्या पर होगा समायोजन, देखें
- UPSSSC फॉरेस्ट गार्ड भर्ती 2026 का विज्ञापन जारी
मौसम के पूर्वानुमान के लिए अभी तक राडार और उपग्रह के आंकड़ों पर ही निर्भरता बनी हुई है। अब लिडार तकनीक के इस्तेमाल से मौसम का सही-सही पूर्वानुमान करना आसान हो जाएगा। डीआरडीओ ने मौसम विभाग और नौसेना मुख्यालय के समक्ष मेघसूचक का प्रदर्शन किया है। डीआरडीओ का दावा है कि यह तकनीक सभी मानकों पर खरी उतरी है। डीआरडीओ की देहरादून स्थित प्रयोगशाला इंस्ट्रूमेंट रिसर्च एंड डवलपमेंट इस्टेबलिसमेंट ने इसे विकसित किया है। डीआरडीओ के सूत्रों के अनुसार इस तकनीक को जल्द ही मौसम विभाग को सौंपा जा सकता है।
इस तरह करेगी काम : लिडार तकनीक में लेजर के जरिये बादलों एवं धूलकणों का आकलन किया जाता है। इसमें एक लेजर बीम के जरिये किरणें बादलों एवं धूलकणों तक जाती हैं तथा उनसे टकराकर वापस लौटती हैं।