वादियों को कहा-आप 15 ऐसे लोगों को लाएं जिनके बारे में आयोग का दावा है कि वे मर चुके हैं
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया की समीक्षा कर रहा है। यदि यह पाया गया कि सूची से बड़े पैमाने पर नाम बाहर हैं, तो हम तुरंत हस्तक्षेप करेंगे।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पुनरीक्षण प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मामले में विस्तृत सुनवाई के लिए 12 और 13 अगस्त की तिथि तय कर दी। पीठ ने सभी पक्षों को लिखित दलीलें पेश करने के लिए आठ अगस्त तक की तारीख तय की और दोनों पक्षों की ओर से इसके लिए नोडल अधिकारी भी तय कर दिए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण ने पीठ को बताया कि आयोग ने 65 लाख
गैर सरकारी संगठनों के रूप में काम करें पार्टियां : शीर्ष कोर्ट
पीठ राजनीतिक दलों को इस समय गैर-सरकारी संगठनों के रूप में कार्य करना चाहिए और नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले चल रही प्रक्रिया में सहयोग देना चाहिए। प्रशांत भूषण: चुनाव आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि 65 लाख लोग स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए अथवा मर चुके हैं।
सिब्बल: सिर्फ आयोग जानता है कि ये 65 लाख लोग कौन हैं? अगर मसौदा सूची में उनके नाम दर्ज होते हैं, तो याचिकाकर्ताओं को कोई समस्या नहीं होगी।
नाम इस आधार पर बाहर कर दिए हैं कि उन्होंने गणना फॉर्म जमा नहीं किए। आयोग का दावा है, इनमें से कई मर चुके हैं या स्थायी रूप से निवास बदल लिया है। इस पर पीठ ने कहा, हम एक अगस्त को प्रकाशित होने
पीठ : अगर मसौदा सूची में स्पष्ट कुछ नहीं लिखा है, तो कोर्ट के संज्ञान में ला सकते हैं। द्विवेदी : मसौदा सूची प्रकाशित हो जाने
के बाद भी गणना
कोर्ट रूम लाइव
फॉर्म भरे जा सकते हैं।
पीठ : याचिकाकर्ता आठ अगस्त तक मामले में अपनी लिखित दलीलें पेश करें।
आयोग सांविधानिक प्राधिकारी, कानून के अनुसार काम करने के लिए बाध्य… सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, एक सांविधानिक संस्था होने के नाते निर्वाचन आयोग को कानून के अनुसार काम करना होता है। यदि उसकी ओर से कोई भी गलती होती है तो याचिकाकर्ता उसे हमारे संज्ञान में लाएं। हम आपकी बात सुनेंगे।
वाली मसौदा मतदाता सूची को लेकर आपकी आशंकाओं पर सुनवाई करेंगे। आपकी आशंका है कि लगभग 65 लाख लोग मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे। चुनाव आयोग 2025 की प्रविष्टि
के संबंध में सुधार कर रहा है। हम न्यायिक प्राधिकारी के रूप में इसकी समीक्षा कर रहे हैं। अगर बड़े पैमाने लोगों को सूची से बाहर रखा जाता है, तो हम तुरंत दखल देंगे। आप 15 ऐसे लोगों को लाएं, जिनके बारे में पर
आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही असली तस्वीर सामने आएगी : आयोग
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने दलील दी, नामों को बाहर करने पर आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही असली तस्वीर सामने आएगी कि किसे बाहर रखा गया है।
द्विवेदी ने कहा, लोगों को आपत्ति करने का अधिकार है। आपत्ति के लिए 30 दिन का समय दिया है।
याचिकाकर्ताओं को नाम जुड़वाने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 15 सितंबर तक यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।
आयोग का दावा है कि वे मर चुके हैं, पर वे जीवित हैं। सुनवाई के दौरान सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया गया है।