नई दिल्ली। अगर आपकी याददाश्त कमजोर हो रही है या छोटी-छोटी बातें भूल जाते हैं तो नेशनल जियोग्राफिक की एक नई रिपोर्ट में छह ऐसी रणनीतियों का खुलासा किया गया है, जिन्हें विज्ञान ने स्मृति बढ़ाने का अचूक उपाय माना है।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग के अनुसार यह नुस्खे न तो दवाइयों के भरोसे हैं और न ही किसी जटिल तकनीक पर आधारित हैं बल्कि जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव कर आपकी मस्तिष्क शक्ति को नए सिरे से तराश सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि नियमित व्यायाम से लेकर स्लीप कंसोलिडेशन जैसी तकनीकें मस्तिष्क की कोशिकाओं में स्थायी

स्मृति संरचना बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञों ने इन रणनीतियों को तीन श्रेणियों में बांटा है। पहली,
मस्तिष्क के न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ावा देने वाली तकनीकें दूसरी, ध्यान और एकाग्रता को दुरुस्त
करने वाले अभ्यास और तीसरी, स रीकॉल ट्रिगर्स के सहारे स्मृति पुनरावलोकन की प्रक्रिया।
व्यायाम है दिमाग के लिए दौड़ती सांसें नियमित एरोबिक व्यायाम जैसे तेज चलना, साइकिल चलाना या योग आपके 2 मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है। हिप्पोकैम्पस की ग्रोथ होती है, जो यादों को संरक्षित करने वाली मुख्य संरचना है। हफ्ते में 150 मिनट की कसरत स्मृति को जवान बनाती है।
माइंडफुलनेस मेडिटेशन दिन में सिर्फ 10-15 मिनट
3 का माइंडफुलनेस मेडिटेशन मस्तिष्क की वर्किंग मेमोरी को मजबूत करता है। यह ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाता है और अवांछित विचारों के शोर को कम करता है, जिससे स्मृति की स्पष्टता लौटती है।
5 सीखते रहना : इसके तहत दिमागी कसरत के सवाल-जवाब आते हैं। नई भाषा सीखना, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाना या पहेलियां हल करना। ये सभी गतिविधियों मस्तिष्क की न्यूरल नेटवर्क्स में नयापन लाती हैं। विशेषज्ञ इसे ब्रेन क्रॉस-ट्रेनिंग कहते हैं, जो ताजगी बनाए रखती है
स्लीप कंसोलिडेशन अच्छी नींद में रचती बसती हैं यादें। रात की 5 से 6 घंटे की गहरी नींद, विशेषकर आरईम स्लीप, स्मृति स्थायित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है। नींद के दौरान मस्तिष्क दिनभर की जानकारियों को रीप्ले करता है, जिससे अल्पकालिक स्मृति दीर्घकालिक स्मृति में बदलती है।
स्मृति महल (मेमोरी पैलेस): दिमागी वास्तुकला की लोकी 4. विधि या स्मृति महल तकनीक में किसी परिचित स्थान जैसे घर की कल्पना करके वस्तुओं या सूचनाओं को उसके विभिन्न कोनों में कल्पनाशील रूप से रखा जाता है। इससे जटिल जानकारियों को आसानी से याद रखने में मदद मिलती है।
एसोसिएटिव लिंकिंग इसे यादों की चेन रिएक्शन कहा जाता है। यह रणनीति सूचनाओं को कहानियों, चुटकुलों या चित्रों से जोड़कर याद करने पर आधारित है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब हम जानकारियों को रोचक संदर्भों में बांधते हैं तो मस्तिष्क उन्हें अधिक गहराई से संरक्षित करता है