राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने जिलों में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को शिक्षकों के लिए अनिवार्य किए जाने संबंधी निर्णय पर तत्काल हस्तक्षेप के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सोमवार को जिलों में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। महासंघ ने सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग उठाई है।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय मेधावी व प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने देश भर के लाखों शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा और आजीविका को संकट में डाल दिया है। प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने कहा कि इस निर्णय से शिक्षक असमंजस में हैं।
प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने कहा कि आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर इसका
टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मेरठ में किया प्रदर्शन। संगठन
प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। महासंघ ने समस्या के समाधान तक संघर्ष का एलान किया है। साथ ही केंद्र सरकार व शिक्षा मंत्रालय को शिक्षकों के हित में समाधान
निकालना चाहिए। प्रदर्शन व ज्ञापन देने वालों में प्रदेशीय कोषाध्यक्ष नीलमणि शुक्ला, रविन्द्र पवार, डॉ. श्वेता आदि शामिल थे।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ आज देगा ज्ञापन
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने 29 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को सेवारत रहने देने व पदोन्नति के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि इसके लिए 16 सितंबर को प्रदेश भर में शिक्षक जिला मुख्यालयों पर एकत्र होकर पीएम को संबोधित ज्ञापन देंगे। उन्होंने सभी शिक्षक संगठनों व शिक्षकों से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाएं।