प्रतापगढ़: शासन ने
बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों पर शिकंजा कसने का निर्देश दिया था। शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों को नोटिस देने तक सीमित रहकर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि जिले में बिना मान्यता का कोई विद्यालय पाया गया, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारियों पर होगी।

जिले में कई विद्यालय बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। कुछ संचालक कक्षा आठ तक की मान्यता लेकर हाईस्कूल और इंटर तक की कक्षाएं चला रहे हैं। जेठवारा, नौबस्ता, बाबागंज जैसे क्षेत्रों में ऐसे अमान्य विद्यालयों की भरमार है। बाबागंज विकासखंड में अकेले आधा दर्जन से अधिक विद्यालय बिना मान्यता के धड़ल्ले से चल रहे हैं। इनमें अधिकांश
जनपद में अमान्य स्कूल किसी भी दशा में चलन नहीं पाएंगे। सात अमान्य स्कूलों को नोटिस दी गई थी, सभी ने हलफनामा देकर स्कूल संचालित न करने को कहा है। शिकायत मिलने पर अमान्य स्कूलों के प्रबंधकों पर एक लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। -ओमकार राणा, डीआइओएस
स्कूलों की प्राथमिक स्तर की मान्यता है, लेकिन वे इंटर तक की कक्षाएं संचालित कर रहे हैं।
इन विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। जैसे बिजली, पानी और भवन, फिर भी ये संचालक बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर अभिभावकों को आकर्षित कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश शासन के बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा सचिव का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी दशा में अमान्य स्कूलों का संचालन
नहीं होना चाहिए। लेकिन बाबागंज विकासखंड में इस आदेश की अनदेखी करते हुए दर्जनों अमान्य स्कूल चल रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले वर्ष बिना मान्यता के चल रहे 73 स्कूलों और इस वर्ष 22 स्कूलों को नोटिस जारी किया है। हाल ही में संड़वा चंद्रिका के एक स्कूल पर बीएसए ने एक लाख का जुर्माना लगाया था। वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक ने इस वर्ष सात विद्यालयों को नोटिस जारी की है। सभी ने हलफनामा देकर कहा है कि वे विद्यालय संचालित नहीं करेंगे। स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और जिलाधिकारी प्रतापगढ़ से अपील की है कि जनहित में अमान्य विद्यालयों को तुरंत बंद किया जाए। यह स्थिति शिक्षा के अधिकार और गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है, जिससे बच्चों का भविष्य खतरे में है।