पादरी की याचिका पर फैसला
यह मामला आंध्र प्रदेश के पादरी चिंथाडा आनंद से जुड़ा था। आनंद ने आरोप लगाया था, मेरे साथ जाति के आधार पर भेदभाव व गाली-गलौज हुआ है। उन्होंने एससी/एसटी (उत्पीड़न निवारण) कानून के तहत केस दर्ज कराया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने मई, 2025 में इस एफआईआर को रद्द कर दिया था।
हाईकोर्ट का तर्क था, चूंकि आनंद ईसाई धर्म अपना चुके हैं, वह अब दलित श्रेणी में नहीं आते और इस विशेष कानून का लाभ नहीं ले सकते।
आनंद ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसने हाईकोर्ट के फैसले पर अंतिम मुहर लगा दी है।