प्रयागराज :
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती के विज्ञापन में यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि यह भर्ती कक्षा नौ व 10 में पढ़ाने वाले अध्यापकों के लिए निकाली गई है। कोर्ट ने टीईटी उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता अर्हता में शामिल करने का निर्देश देते हुए राज्य सरकार को भी संशोधन के लिए कहा है और नियम आठ तथा भर्ती विज्ञापन को रद करने की मांग में दाखिल याचिका निस्तारित कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा तथा न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने जौनपुर के अखिलेश व तीन अन्य सहित प्रयागराज के जयहिंद यादव व अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है।
हाई कोर्ट ने कहा, टीईटी उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता को भी अर्हता में शामिल करें
भर्ती विज्ञापन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं निस्तारित
याचिकाओं में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शैक्षिक (प्रशिक्षित स्नातक ग्रेड) सेवा नियमावली, 1983 के नियम आठ को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई थी। कहा गया कि भर्ती विज्ञापन राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के विपरीत है। याचीगण के लिए अधिवक्ता तानिया पांडेय, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता कार्तिकेय सरन और एनसीटीई के लिए अधिवक्ता वैभव
त्रिपाठी आदि ने बहस की। त्रिपाठी का कहना था कि राज्य सरकार ने यह नहीं बताया कि 23 अगस्त 2010 की एनसीटीई की अधिसूचना के अनुसार आवश्यक पात्रता के तहत कोई भर्ती हुई है अथवा उससे संबंधित भर्ती अधिसूचना जारी की गई है। यह नहीं कह सकते कि कक्षा छह से आठ पढ़ाने वाले शिक्षकों के पदों में कोई रिक्ति नहीं आई है। विशेषकर जब अतिरिक्त शिक्षा निदेशक के हलफनामे में यह स्वीकार किया गया है कि 904 संस्थान ऐसे
हैं, जहां छात्र कक्षा छह से आठ तक अध्ययन करते हैं। अतः याचीगण ने इस चूक को प्रदर्शित किया है और अधिक महत्वपूर्ण यह है कि 28 जुलाई 2025 की भर्ती अधिसूचना में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भर्ती किए जाने वाले शिक्षकों को किन कक्षाओं में पढ़ाना होगा।
इस पर राज्य सरकार ने संशोधन की बात स्वीकार की। इसके बाद कोर्ट ने निर्देश दिया कि नियम आठ में उल्लिखित पात्रता के अतिरिक्त टीईटी पास को आवश्यक पात्रता के रूप में शामिल किया जाए। आयोग एक संशोधन जारी करे, जिसमें स्पष्ट किया जाए कि विज्ञापन कक्षा नौ व 10 के शिक्षकों की भर्ती से संबंधित है। इस उद्देश्य के लिए राज्य आवश्यक निर्देश जारी करेगा। इस सीमा तक याचिकाएं स्वीकृत की गईं।