72825,69000 और 12460 शिक्षक भर्तियों में अनोखा ट्रेंड
72825 में 32 हजार पहुंच गई याचिकाकर्ताओं की सं
ख्याप्रयागराज। उत्तर प्रदेश के 60 हजार बेरोजगारों को सुप्रीम कोर्ट से नौकरी की आस लगी है। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में विभिन्न शिक्षक भर्तियों के इन आवेदकों को शीर्ष अदालत से ही आखिरी उम्मीद है। सर्वाधिक बेरोजगारों की फौज सबसे लंबे समय से विवादों में चल रही 72825 प्रशिक्षु भर्ती की है। इसमें न्यूनतम कटऑफ से अधिक होने के बावजूद नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों की याचिकाएं शीर्ष अदालत के विचाराधीन हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में दो महीने पहले जारी याचिकाकर्ताओं की सूची में 25 जुलाई 2017 के पहले हुई याचिकाओं में शामिल 14,851 अभ्यर्थियों का नाम था।

वैसे तो इस मामले में 16 दिसंबर 2025 तक 16,478 अभ्यर्थियों ने विस्तृत प्रोफॉर्मा जमा किया था लेकिन 1627 अभ्यर्थियों के 25 जुलाई 2017 से पहले दायर याचिका का विवरण नहीं
देने के कारण उनका नाम सूची में शामिल नहीं था। हालांकि इस भर्ती से जुड़ी अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान तारीख टलते ही याचियों की संख्या 32 हजार तक पहुंच गई है। चूंकि इस भर्ती में रिक्त 6170 पद पर नियुक्ति को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का रुख सकारात्मक है इसलिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कतार में लग गए हैं।
69000 सहायक अध्यापक भर्ती में
भी तस्वीर लगभग ऐसी ही है। इस भर्ती में ईडब्ल्यूएस, आरक्षण, मेरिट लिस्ट और चयन प्रक्रिया को लेकर दाखिल याचिकाओं से तकरीबन 25 हजार बेरोजगार जुड़े हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से इस मामले में सख्ती से जवाब मांगा था। वहीं 12460 सहायक अध्यापक भर्ती में रिक्त 656 पदों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिकाओं में बेरोजगारों की संख्या लगभग ढाई हजार है।
डेढ़ दशक में भी नहीं सुलझा
परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती शुरू होने के तकरीबन डेढ़ बाद भी विवाद सुलझ नहीं सका है। 30 नवंबर 2011 को विज्ञापन जारी होने के बाद लंबी कानूनी लड़ाई चली और 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले ने 66655 नियुक्तियों को सुरक्षित किया था। हालांकि उसके बावजूद कटऑफ से अधिक अंक पाने वाले तमाम अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए थे। इन्हीं अभ्यर्थियों ने सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिकाएं की हैं।