नई दिल्ली। संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) ने उम्मीदवारों की पहचान तेजी से और सुरक्षित तरीके से करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित चेहरा पहचान प्रणाली की शुरुआत की है। यूपीएससी के चेयरमैन अजय कुमार ने बताया कि 14 सितंबर को हुई एनडीए (नेशनल डिफेंस एकेडमी) और एनए (नेवल एकेडमी) द्वितीय परीक्षा, तथा सीडीएस (कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज) द्वितीय परीक्षा के दौरान इस पायलट प्रोजेक्ट को लागू किया।

कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय ई-गवर्नेस प्रभाग (एनईजीडी) के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता को मजबूत करना और परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों के प्रवेश को सुविधाजनक बनाना है। यूपीएससी भविष्य में सिविल सेवा परीक्षा समेत अपनी सभी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के चेहरे की पहचान प्रणाली का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। आयोग सरकारी नौकरियों के लिए विभिन्न भर्ती परीक्षाएं कराता है। इसमें भारतीय
सत्यापन समय में आई कमी
पायलट प्रोजेक्ट का परीक्षण गुरुग्राम के चुनिंदा केंद्रों पर किया गया। यहां अभ्यर्थियों के चेहरे की तस्वीरों का उनके पंजीकरण फॉर्म में जमा की गई तस्वीरों से डिजिटल मिलान किया गया। इस नई प्रणाली से सत्यापन का समय घटकर प्रति उम्मीदवार औसतन केवल 8-10 सेकंड रह गया। इससे प्रवेश प्रक्रिया में काफी सुगमता आई और सुरक्षा का एक अतिरिक्त स्तर जुड़ गया।
प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) जैसे पदों के लिए अधिकारियों का चयन करने के लिए सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल है। कुमार ने बताया कि लॉजिस्टिक्स, जैसे वाई-फाई की उपलब्धता और चेहरा पहचान करने में शामिल कर्मचारियों को दिया जाने वाला प्रशिक्षण महत्वपूर्ण पहलू हैं। इस संबंध में आवश्यक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अभी विकसित किए जा रहे हैं।