कैबिनेट बैठक में सीएम ने कर्मचारियों को भी योजना में शामिल करने का दिया निर्देश
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने लंबे समय से चल रहे ऊहापोह पर विराम लगाते हुए उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने पर मुहर लगा दी है। इतना ही नहीं इस योजना में उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी शामिल कर लिया गया है। इस तरह योजना में लगभग 1.30 लाख शिक्षक, 70 हजार कर्मचारी कुल दो लाख लोग लाभांवित होंगे।
उच्च शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव पर मंगलवार को कैबिनेट ने मुहर लगाई। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि इसके तहत उच्च शिक्षा विभाग के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों के नियमित व स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षक, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षक तथा राज्य विश्वविद्यालयों के नियमित व स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। साथ ही इन सभी शिक्षक-
पांच लाख तक की चिकित्सा सुविधा का मिलेगा लाभ, सालाना खर्च होंगे 50 करोड़
कर्मचारियों के आश्रित परिवार के सदस्यों को भी सरकारी अस्पतालों व संबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। योजना के तहत प्रति शिक्षक व कर्मचारी 2479.70 रुपये का प्रीमियम खर्च होगा। प्रदेश के लगभग 2 लाख से अधिक शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी इससे लाभांवित होंगे। इस पर सरकार लगभग 50 करोड़ रुपये सालाना का व्यय वहन करेगी।
उन्होंने बताया कि योजना का संचालन राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। योजना के तहत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। इसकी दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार होंगी।
योजना के लाभार्थियों और उनके आश्रितों का विवरण उच्च शिक्षा विभाग हर साल 30 जून तक साचीज को उपलब्ध कराएगा। बता दें कि उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए 20 करोड़ रुपये का पहले ही नए वित्तीय वर्ष के बजट में प्रावधान किया है।